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सरकार ने फिर दोहराया- पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं: यह विदेश यात्रा के लिए जारी होने वाला डॉक्यूमेंट, 8% से भी कम भारतीयों के पास है

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 15, 2026, 02:14 AM IST
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केंद्र सरकार ने फिर से स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह एक यात्रा दस्तावेज है, जो 8% से भी कम भारतीयों के पास है।

केंद्र सरकार ने हाल ही में एक बार फिर से यह स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस विषय पर जानकारी देते हुए कहा कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के अनुसार, भारत सरकार केवल भारतीय नागरिकों को विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट जारी करती है। इस प्रकार, पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, जिसका उपयोग केवल विदेश यात्रा के लिए किया जा सकता है।

जायसवाल ने यह भी बताया कि पासपोर्ट एक ऐसा दस्तावेज है जिसे जारी करने से पहले पूरी तरह से जांच और सत्यापन की प्रक्रिया से गुजारा जाता है। यह प्रक्रिया पासपोर्ट अधिनियम, 1967 और पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत संचालित होती है। इस प्रक्रिया में आवेदक की पहचान, निवास, और अन्य आवश्यक जानकारियों की पुष्टि की जाती है। इसके अलावा, मंत्रालय ने बताया कि भारत में 8% से भी कम नागरिकों के पास पासपोर्ट है, जो इस बात को दर्शाता है कि यह दस्तावेज व्यापक रूप से उपलब्ध नहीं है।

सरकार के इस बयान का संदर्भ उस समय का है जब चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के रूप में उपयोग करने के विषय पर सवाल उठाए गए थे। विदेश मंत्रालय ने 24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर यह स्पष्ट किया था कि पासपोर्ट एक यात्रा दस्तावेज है, न कि नागरिकता का प्रमाण। यह बयान उस समय आया जब नागरिकता से संबंधित कई मुद्दों पर राजनीतिक चर्चाएँ तेज हो गई थीं।

इस संदर्भ में अधिकारियों ने यह भी बताया कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत, जनहित में जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार किसी गैर-भारतीय नागरिक को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। इस प्रकार, पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। यह स्थिति इस बात को और स्पष्ट करती है कि पासपोर्ट का उद्देश्य केवल यात्रा करना है, न कि नागरिकता का प्रमाण देना।

विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद, विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो इसे किस आधार पर जारी किया जाता है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं है, तो फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का सबूत है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार उन लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाने की जमीन तैयार कर रही है, जिनसे उसकी राजनीतिक असहमति है।

इस विषय पर कई सवाल उठते हैं, जिनका उत्तर जानना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, पासपोर्ट का उपयोग क्यों होता है और इसका क्या महत्व है? पासपोर्ट एक अंतरराष्ट्रीय पहचान पत्र है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा जारी किया जाता है। इसका मुख्य उपयोग भारत से बाहर यात्रा करने के लिए होता है। विदेश यात्रा के लिए आवश्यक 'वीजा' इसी पासपोर्ट पर लगाया जाता है। दूसरे देश में रहने के दौरान, पासपोर्ट धारक की पहचान, नाम और पते का सबसे बड़ा सरकारी सबूत बनता है। यह दस्तावेज विदेश में कानूनी एंट्री करने और वहां किसी भी मुसीबत में फंसने पर भारत सरकार से मदद पाने के लिए आवश्यक होता है।

क्या पासपोर्ट राष्ट्रीयता की पहचान देता है? हां, पासपोर्ट राष्ट्रीयता की पहचान देता है। राष्ट्रीयता यह बताती है कि आप किस देश से संबंध रखते हैं, जबकि नागरिकता यह बताती है कि उस देश में आपको कौन-कौन से कानूनी अधिकार प्राप्त हैं। राष्ट्रीयता आपकी पहचान होती है, जबकि नागरिकता आपके अधिकारों और जिम्मेदारियों को निर्धारित करती है।

विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट की संख्या को लेकर भी जानकारी दी है। पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवा केंद्रों और संबंधित सुविधाओं की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है। इसके अलावा, 2025 में शुरू हुए चिप आधारित ई-पासपोर्ट की अब तक 1.47 करोड़ प्रतियां जारी की जा चुकी हैं। आवेदन निपटाने का औसत समय घटकर 5-6 दिन रह गया है। 2019 के 16 देशों के मुकाबले अब 27 देश भारतीयों को वीजा-फ्री प्रवेश देते हैं।

क्या भारतीय नागरिकता साबित करने वाला कोई एक दस्तावेज है? नहीं, भारत कोई ऐसा एक दस्तावेज जारी नहीं करता है जो सभी नागरिकों के लिए नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाए। नागरिकता इस बात पर निर्भर करती है कि इसे कैसे प्राप्त किया गया है और नागरिकता कानून के तहत कौन से रिकॉर्ड मौजूद हैं।

पहचान पत्र अपने आप नागरिकता साबित क्यों नहीं करते? आधार, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज विशेष कार्यों के लिए जारी किए जाते हैं, जैसे पहचान की जांच, चुनाव में रजिस्ट्रेशन या गाड़ी चलाने की अनुमति। इन्हें नागरिकता तय करने के लिए नहीं बनाया गया है, इसलिए इन्हें अपने आप में नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जाता।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, जो विदेश में धारक की राष्ट्रीयता को दर्शाता है। कानूनी रूप से, नागरिकता 'नागरिकता कानून' के तहत तय होती है, जबकि पासपोर्ट 'पासपोर्ट कानून' के तहत जारी होता है और यह हर परिस्थिति में अपने आप में नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं होता।

क्या पासपोर्ट रद्द होने पर नागरिकता खत्म हो जाती है? नहीं, पासपोर्ट का रद्द होना यह नहीं दर्शाता कि व्यक्ति की भारतीय नागरिकता समाप्त हो गई है। पासपोर्ट कई कारणों से रद्द या निलंबित हो सकता है, जैसे गलत जानकारी देकर बनवाना, कानूनी मामलों में कार्रवाई, सुरक्षा कारण, या पासपोर्ट अधिनियम के तहत उल्लंघन। लेकिन भारतीय नागरिकता खत्म करने की प्रक्रिया अलग है और यह Citizenship Act, 1955 के तहत होती है।

भारत में नागरिकों को मिलने वाले प्रमुख दस्तावेज कौन से हैं? भारत में नागरिकता के मामले में कई दस्तावेजों का उपयोग किया जा सकता है। इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने भी इस विषय में महत्वपूर्ण टिप्पणी की थी। बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह पहचान का दस्तावेज है। हालांकि, अदालत ने चुनाव आयोग से कहा था कि SIR प्रक्रिया में आधार को पहचान के लिए एक वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। साथ ही स्पष्ट किया था कि जरूरत पड़ने पर चुनाव आयोग नागरिकता और पात्रता की पुष्टि के लिए अन्य दस्तावेज भी मांग सकता है।

इस प्रकार, यह स्पष्ट है कि भारत में पासपोर्ट, आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य पहचान पत्र नागरिकता के प्रमाण के रूप में नहीं माने जा सकते हैं। ये सभी दस्तावेज केवल पहचान के लिए उपयोग किए जाते हैं और नागरिकता के अधिकारों और दायित्वों को स्पष्ट करने में सहायक होते हैं।

इस विषय पर आगे की चर्चा और बहस जारी रहेगी, विशेषकर जब यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ में महत्वपूर्ण होता जा रहा है। नागरिकता, पहचान, और अधिकारों के मुद्दों पर सरकार और विपक्ष दोनों के बीच मतभेद स्पष्ट होते जा रहे हैं, और यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में इस पर और क्या कदम उठाए जाएंगे।

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