दिल्ली हाई कोर्ट का सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य जांच का आदेश

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 16, 2026, 02:30 PM IST
7 min read
  • linkedin
  • twitter
  • facebook
  • instagram
  • whatsapp

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की निगरानी के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिया है। वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। यह आदेश तब आया जब वांगचुक जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति की रोज़ाना क्लीनिकल मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए और उनकी सेहत में सुधार के लिए आवश्यक चिकित्सा हस्तक्षेप तुरंत किया जाए। अदालत ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आवश्यक चिकित्सा हस्तक्षेप का आशय क्या है, लेकिन यह संकेत दिया कि स्वास्थ्य की देखभाल में कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन अत्यंत मूल्यवान होता है और उसे बचाने के लिए सरकारी अधिकारियों द्वारा हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि वांगचुक की नियमित रूप से चिकित्सा जांच की जानी चाहिए। यदि डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर कोई दवा या इलाज की आवश्यकता होती है, तो उसे तुरंत प्रदान किया जाना चाहिए।

सरकार का पक्ष और कोर्ट का आदेश

केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए पहले से ही सरकारी डॉक्टरों और विशेषज्ञों की एक टीम तैनात है। उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टरों के आकलन के आधार पर उचित चिकित्सा प्रदान की जाएगी। अदालत ने इस आश्वासन की सराहना की और निर्देश दिया कि वांगचुक के स्वास्थ्य की स्थिति का रोज़ाना रिव्यू जारी रखा जाए। इसके बाद अदालत ने इस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया।

याचिका में क्या मांग की गई थी?

यह जनहित याचिका वकील राकेश कुमार सैनी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार से मांग की गई थी कि सोनम वांगचुक को किसी सरकारी अस्पताल में स्थानांतरित किया जाए और उनके लिए आवश्यक पोषक तत्व, विटामिन और खनिज प्रदान करने के लिए जबरन तरल आहार (force-feeding) का सहारा लिया जाए। यह मांग इस आधार पर की गई थी कि वांगचुक की भूख हड़ताल से उनकी सेहत पर गंभीर खतरे के संकेत मिल रहे थे।

सोनम वांगचुक का आंदोलन

सोनम वांगचुक, जो एक प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर हैं, ने NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) पेपर लीक सहित परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई है। वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका यह आंदोलन युवा छात्रों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक बड़े राजनीतिक आंदोलन का हिस्सा है, जिसे 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नाम से जाना जाता है। वांगचुक की भूख हड़ताल 28 जून से चल रही है, जो उनके आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है।

वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति

सोनम वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर नजर रखने वाले सीनियर जनरल फिजिशियन डॉ. सतीश लांबा ने हाल ही में वांगचुक के स्वास्थ्य की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वांगचुक का वजन घटकर 56.65 किलोग्राम हो गया है, जो पिछले 24 घंटों में 500 ग्राम की कमी दर्शाता है। भूख हड़ताल शुरू करने के बाद से उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है। उनके ब्लड प्रेशर 105/61 mmHg, ब्लड शुगर लेवल 80 mg/dL और ऑक्सीजन सैचुरेशन 97% दर्ज किया गया है। यह आंकड़े उनके स्वास्थ्य की गंभीरता को दर्शाते हैं।

समर्थन का व्यापक आधार

सोनम वांगचुक को विभिन्न राजनीतिक नेताओं, मशहूर हस्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन प्राप्त हुआ है। उद्धव सेना के नेता आदित्य ठाकरे ने वांगचुक के प्रति BJP की "संवेदनहीनता" की आलोचना की और उनकी मांगों का समर्थन किया। उन्होंने लिखा कि BJP को उस युवा भारत की कोई परवाह नहीं है जिसके लिए वांगचुक उपवास कर रहे हैं। इसके अलावा, कई अन्य हस्तियों ने भी वांगचुक के समर्थन में अपनी आवाज उठाई है, जिनमें महुआ मोइत्रा, अखिलेश यादव, चंद्रशेखर आज़ाद, ओमी वैद्य, आशीष चंचलानी, भुवन बम, अतुल कुलकर्णी, शशि थरूर, अरविन्द केजरीवाल, वीरदास, अरुंधति रॉय, शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह शामिल हैं।

आंदोलन का महत्व

सोनम वांगचुक का यह आंदोलन केवल उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह भारतीय शिक्षा प्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं और असमानताओं के खिलाफ एक व्यापक संघर्ष का हिस्सा है। NEET पेपर लीक जैसी घटनाएं न केवल छात्रों के भविष्य को प्रभावित करती हैं, बल्कि यह भी दर्शाती हैं कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की कितनी आवश्यकता है। वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं का संघर्ष युवा पीढ़ी के अधिकारों और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

इस प्रकार, दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश न केवल सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि न्यायालय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तत्पर है। यह मामला आगे चलकर शिक्षा प्रणाली में सुधार और युवा अधिकारों के प्रति जागरूकता फैलाने में भी सहायक हो सकता है।

वांगचुक के आंदोलन की गूंज केवल भारत में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुनाई दे रही है। पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता को लेकर वैश्विक समुदाय में भी जागरूकता बढ़ रही है। ऐसे में वांगचुक का यह आंदोलन एक प्रेरणा बन सकता है, जो अन्य कार्यकर्ताओं को भी अपने अधिकारों और मुद्दों के लिए खड़ा होने के लिए प्रेरित कर सकता है।

सोनम वांगचुक का कार्य सिर्फ पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि शिक्षा में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। उनकी भूख हड़ताल जैसे कदम, जो उन्होंने अपने आंदोलन के तहत उठाए हैं, यह दर्शाते हैं कि वे अपने विचारों और मान्यताओं के प्रति कितने प्रतिबद्ध हैं। यह आंदोलन ऐसे समय में हो रहा है जब भारतीय शिक्षा प्रणाली में कई चुनौतियाँ मौजूद हैं, जिसमें परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, समानता और छात्रों के लिए अवसरों की उपलब्धता शामिल है।

वांगचुक की भूख हड़ताल ने न केवल उनकी व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति को उजागर किया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार युवा पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो रही है। यह आंदोलन उन छात्रों के लिए एक प्रेरणा है जो अपनी आवाज उठाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वांगचुक की यह भूख हड़ताल एक संकेत है कि युवा भारत अब चुप नहीं रह सकता और वे अपने भविष्य के लिए लड़ने के लिए तैयार हैं।

इस आंदोलन का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह समाज में जागरूकता बढ़ाने का काम कर रहा है। वांगचुक के समर्थन में उठने वाले लोगों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में लाने में मदद की है। इससे यह स्पष्ट होता है कि शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता केवल एक व्यक्ति की मांग नहीं है, बल्कि यह एक सामूहिक आवश्यकता है।

दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश वांगचुक के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है, लेकिन यह भी एक संकेत है कि न्यायालय इस बात को समझता है कि शिक्षा और पर्यावरण के मुद्दे समाज के लिए कितने महत्वपूर्ण हैं। यह आदेश न केवल वांगचुक के लिए, बल्कि उन सभी के लिए एक उम्मीद की किरण है जो शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में काम कर रहे हैं।

आखिरकार, वांगचुक का आंदोलन भारतीय समाज में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने की क्षमता रखता है। यह न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक कदम है, बल्कि यह युवा पीढ़ी को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करने का भी एक माध्यम है। ऐसे आंदोलनों की आवश्यकता है जो न केवल समस्याओं को उजागर करें, बल्कि समाधान के लिए भी प्रेरित करें। वांगचुक का यह संघर्ष हमें यह याद दिलाता है कि परिवर्तन संभव है, जब हम अपने अधिकारों के लिए खड़े होते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए संघर्ष करते हैं।

Get More Updates

To learn more about the latest developments in Health & Public Safety, stay updated with our exclusive reports and analyses on AiLensNews.

Related News