बिलासपुर में रिटायर्ड कर्मचारी से 35 लाख की ठगी की कोशिश, IPS बनकर किया डिजिटल अरेस्ट

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 25, 2026, 10:58 AM IST
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बिलासपुर में साइबर ठग ने रिटायर्ड कर्मचारी को IPS अधिकारी बनकर 35 लाख रुपए की ठगी करने की कोशिश की। पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर बुजुर्ग को बचाया।

बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में एक रिटायर्ड कर्मचारी को साइबर ठगों द्वारा 35 लाख रुपए की ठगी का प्रयास किया गया। यह मामला उस समय प्रकाश में आया जब ठग ने खुद को एक आईपीएस अधिकारी बताकर बुजुर्ग को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसने का डर दिखाया। इस घटना ने न केवल पुलिस को सतर्क किया, बल्कि यह भी दिखाया कि कैसे साइबर अपराधियों की चालाकी और तकनीकी ज्ञान के चलते आम नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा है।

यह घटना 24 अगस्त को सरकंडा के सीपत रोड निवासी 68 वर्षीय सीनियर सिटीजन के साथ हुई। ठग ने उन्हें फोन किया और खुद को मुंबई के बाराबंकी का आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम बताया। इस तरह की पहचान बनाकर ठग ने बुजुर्ग को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि वह एक उच्च पदस्थ पुलिस अधिकारी हैं। इस प्रकार के साइबर ठगी के मामलों में अक्सर अपराधी खुद को सरकारी अधिकारियों के रूप में पेश करते हैं, जिससे पीड़ित को डर और भ्रमित किया जा सके।

ठग ने बुजुर्ग को बताया कि वह एक गंभीर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसने वाले हैं और उन्हें तुरंत कार्रवाई करनी होगी। इसके बाद, आरोपी ने बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर दिया, जिसका मतलब था कि उन्हें घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया और उन्हें अपने मोबाइल कैमरे के सामने लगातार बैठने की हिदायत दी गई। यह तकनीक अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली एक नई विधि है, जिसमें वे पीड़ित को मानसिक रूप से परेशान कर उनकी सोचने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं।

इस दौरान, ठगों ने बुजुर्ग को लगातार डराया और उन्हें यह समझाने की कोशिश की कि अगर वे उनकी बात नहीं मानेंगे तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। इस डर के चलते, बुजुर्ग ने अपने विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि को एक ही खाते में ट्रांसफर करने के लिए सहमति दे दी। इस प्रक्रिया में, ठगों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि यह सब कुछ पुलिस के निर्देशानुसार किया जा रहा है।

बुजुर्ग द्वारा यह सब किए जाने के बाद, लगभग 35 लाख रुपए एक खाते में जमा हो गए। ठग अब इस राशि को निकालने या किसी अन्य खाते में ट्रांसफर करने की योजना बना रहे थे। इस समय, बुजुर्ग के एक मित्र ने उन्हें फोन किया और जब उन्होंने अपनी स्थिति बताई, तो मित्र ने तुरंत एसएसपी रजनेश सिंह को कॉल करके मामले की जानकारी दी।

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए, एसएसपी रजनेश सिंह ने तुरंत सरकंडा थाना प्रभारी प्रदीप आर्या को मौके पर भेजा। पुलिस ने संबंधित मोबाइल नंबरों की जांच शुरू की और पाया कि ये नंबर फ्रॉड गतिविधियों में शामिल थे। पुलिस की तत्परता के कारण बुजुर्ग को ठगी का शिकार होने से बचा लिया गया और उनकी राशि सुरक्षित रही।

इसके बाद, पुलिस ने मामले की रिपोर्ट नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCCRP) पर भी दर्ज की। इस रिपोर्ट के माध्यम से पुलिस ने संबंधित मोबाइल नंबरों और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाया। पुलिस ने ठगी के इस प्रयास से जुड़े आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी साक्ष्य जुटाने का कार्य शुरू किया। इस प्रकार की साइबर ठगी में अक्सर अपराधी विभिन्न तकनीकी तरीकों का उपयोग करते हैं, जैसे कि फर्जी पहचान पत्र, नकली वेबसाइट, और धोखाधड़ी वाले फोन नंबर।

इस घटना ने साइबर सुरक्षा के महत्व को एक बार फिर से उजागर किया है। एसएसपी रजनेश सिंह ने लोगों से अपील की है कि वे साइबर अपराधों के प्रति जागरूक रहें। उन्होंने कहा कि कोई भी पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल या फोन पर डिजिटल अरेस्ट करने और बैंक खाते की रकम ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता है। इस प्रकार की कॉल आने पर घबराने की बजाय, तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों ने समाज में चिंता पैदा की है। यह घटना इस बात का उदाहरण है कि कैसे ठग तकनीकी ज्ञान का उपयोग कर आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए, लोगों को चाहिए कि वे अपने व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी को सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर सावधानी बरतें।

बिलासपुर पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई की और यह सुनिश्चित किया कि बुजुर्ग को कोई नुकसान न हो। इस प्रकार की घटनाओं से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन को और अधिक जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है, ताकि लोग साइबर ठगी के तरीकों और उनसे बचने के उपायों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकें।

साइबर अपराधों के खिलाफ लड़ाई में जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण हथियार है। लोग जितना अधिक जागरूक होंगे, उतना ही वे इन ठगों से बच सकेंगे। इसलिए, सभी नागरिकों को इस प्रकार के मामलों में सतर्क रहना चाहिए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट तुरंत संबंधित अधिकारियों को करनी चाहिए। इसके अलावा, यह भी आवश्यक है कि परिवार के सदस्य, विशेषकर बुजुर्गों, को इस प्रकार के धोखाधड़ी के तरीकों के बारे में जानकारी दें ताकि वे ऐसे मामलों में सतर्क रह सकें।

साइबर ठगी के मामलों में वृद्धि के चलते, सरकार और पुलिस विभाग को भी नए उपायों पर विचार करना चाहिए। इसमें साइबर सुरक्षा के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, और तकनीकी संसाधनों का विकास शामिल हो सकता है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि आम नागरिकों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाए और उन्हें यह समझाया जाए कि उन्हें किस प्रकार की जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

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