बेमेतरा में 50 साल की महिला की हत्या: आरोपी ने रेप के बाद शव को काटकर नदी में फेंका

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 18, 2026, 12:06 AM IST
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छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में 50 वर्षीय महिला की हत्या के मामले में आरोपी ने पहले रेप की कोशिश की, फिर हत्या कर शव को टुकड़ों में बांधकर नदी में फेंका।

छत्तीसगढ़ राज्य के बेमेतरा जिले में 6 जुलाई को एक 50 वर्षीय महिला की हत्या का मामला एक बार फिर से महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को उठाता है। यह घटना चंदनू थाना क्षेत्र में हुई, जहां महिला का नाम और पहचान अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। आरोपी रामप्रसाद सोनवानी, जो कि 42 वर्ष का है, पर आरोप है कि उसने पहले महिला के साथ बलात्कार की कोशिश की और जब महिला ने इसका विरोध किया, तो उसने उसे बेरहमी से हत्या कर दी। इसके बाद, उसने शव के साथ भी दुष्कर्म किया और उसे काटकर नदी में फेंक दिया।

यह घटना न केवल बेमेतरा जिले बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर करती है। महिला अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने इस प्रकार की घटनाओं की निंदा की है और सरकार से सख्त कार्रवाई की मांग की है। ऐसे मामलों में अक्सर समाज की संरचना और सुरक्षा तंत्र की विफलता को जिम्मेदार ठहराया जाता है।

पुलिस के अनुसार, महिला 7 जुलाई को अपने घर से लापता हो गई थी। उसके परिवार ने उसकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद, परिजनों ने चंदनू थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। 9 जुलाई को, मृतका के बेटे को अमरैया नाला और शिवनाथ नदी के किनारे एक गठरी मिली, जिसमें महिला का धड़ था। दूसरी गठरी में उसके कटे हुए हाथ और पैर थे। शव की स्थिति अत्यंत खराब थी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि हत्या के बाद शव को काफी समय तक छिपाकर रखा गया था।

पुलिस ने बताया कि आरोपी रामप्रसाद सोनवानी ने 6 जुलाई की रात लगभग 10 बजे महिला के घर में घुसकर दुष्कर्म की कोशिश की। महिला ने जब इसका विरोध किया, तो आरोपी ने फावड़े के बेंत से उसके सिर पर वार कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद, उसने शव के साथ दुष्कर्म किया। यह घटना न केवल हत्या का मामला है, बल्कि यह एक गंभीर मानसिक विकार की भी ओर इशारा करती है, जिसे नेक्रोफिलिया कहा जाता है। यह एक असामान्य स्थिति है, जिसमें व्यक्ति मृत शरीर के प्रति यौन आकर्षण महसूस करता है।

अपराध के बाद, आरोपी ने शव को पहचान छिपाने के उद्देश्य से काट दिया। उसने घर में रखी लकड़ी काटने वाली आरी का उपयोग किया और शव के हिस्सों को अलग-अलग गठरियों में बांधकर अपनी झोपड़ी में रखा। अगली रात, उसने इन गठरियों को शिवनाथ नदी के पास फेंक दिया। इस दौरान, आरोपी ने मृतका के घर से 2500 रुपए भी चुराए। पुलिस की पूछताछ में उसने बताया कि उसने 2000 रुपए खर्च कर दिए, जबकि 500 रुपए पुलिस ने उसके कब्जे से बरामद किए।

पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया। ड्रोन कैमरा, नाव और सर्च लाइट के माध्यम से इलाके की गहन तलाशी ली गई। डॉग स्क्वॉड और फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए। लगातार पूछताछ और तकनीकी साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने रामप्रसाद सोनवानी पर शक किया और उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। आरोपी ने अंततः अपना अपराध कबूल कर लिया।

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि रामप्रसाद सोनवानी पहले भी हत्या के मामले में जेल जा चुका है। 2017 में, उसने गांव की एक अन्य महिला की हत्या की थी और उस मामले में सजा काट चुका है। उसके खिलाफ पहले से ही प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जा चुकी है। इस प्रकार के अपराधों में पुनरावृत्ति की संभावना को देखते हुए, विशेषज्ञों का मानना है कि समाज और कानून व्यवस्था को सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि ऐसे अपराधों को रोका जा सके।

इस घटना के बाद, बेमेतरा जिले में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग को महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। इस प्रकार की घटनाएं केवल एक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि यह पूरे समुदाय को प्रभावित करती हैं।

महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि के कारण, समाज में सुरक्षा के प्रति चिंता बढ़ रही है। यह जरूरी है कि समाज के सभी वर्गों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर काम करना चाहिए। शिक्षा, जागरूकता और कानून के प्रति सम्मान को बढ़ावा देने से ही इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सकता है।

इस तरह की घटनाओं के पीछे अक्सर सामाजिक, आर्थिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे होते हैं। इसलिए, केवल दंडात्मक कार्रवाई के बजाय, समाज को इस समस्या के मूल कारणों की पहचान करनी चाहिए और उन्हें संबोधित करना चाहिए। इससे न केवल महिलाओं की सुरक्षा में सुधार होगा, बल्कि समाज में एक सकारात्मक बदलाव भी आएगा।

इस घटना ने यह भी स्पष्ट किया है कि पुलिस और न्यायिक प्रणाली को अधिक प्रभावी और संवेदनशील होना चाहिए, ताकि ऐसे मामलों में त्वरित और उचित कार्रवाई की जा सके। इसके लिए पुलिस बल को विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है, ताकि वे इस तरह के संवेदनशील मामलों को बेहतर तरीके से संभाल सकें।

अंत में, यह घटना बेमेतरा जिले में महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर से सामने लाती है। समाज को इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सभी को मिलकर एक सुरक्षित और सुरक्षित वातावरण बनाने के लिए काम करना होगा, जहां महिलाएं स्वतंत्रता और सम्मान के साथ जी सकें।

महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर विचार करते समय, यह महत्वपूर्ण है कि हम केवल घटनाओं की निंदा न करें, बल्कि इसके पीछे के कारणों को भी समझें। यह आवश्यक है कि समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ाया जाए, ताकि लोग महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा के महत्व को समझ सकें। इसके साथ ही, सामुदायिक कार्यक्रमों और कार्यशालाओं के माध्यम से जागरूकता बढ़ाना भी आवश्यक है।

इसके अलावा, यह भी महत्वपूर्ण है कि स्थानीय प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय हो, ताकि महिलाओं के खिलाफ अपराधों की रोकथाम के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें। इसके लिए, पुलिस को महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच में संवेदनशीलता और तत्परता से काम करना चाहिए।

आखिरकार, यह घटना हमें याद दिलाती है कि समाज में महिलाओं की सुरक्षा केवल एक कानूनी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। सभी वर्गों को मिलकर इस दिशा में काम करना होगा ताकि हम एक सुरक्षित और समर्पित समाज का निर्माण कर सकें।

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