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विदेश मंत्रालय: 'फारस की खाड़ी में सबसे ज्यादा भारतीय नाविकों की मौत हुई'

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 14, 2026, 05:35 PM IST
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विदेश मंत्रालय ने फारस की खाड़ी में भारतीय नाविकों पर हुए हमलों के बारे में जानकारी दी, जिसमें कई भारतीय नागरिकों की मौत हुई है।

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने हाल ही में फारस की खाड़ी में भारतीय नाविकों की मौतों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत पश्चिम एशिया में हो रही घटनाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते सुरक्षित और निर्बाध जहाजों की आवाजाही और व्यापार जारी रखने की अपील करता है। यह सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों की आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक है।

फारस की खाड़ी एक रणनीतिक जलमार्ग है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। यह क्षेत्र वैश्विक तेल और गैस की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है, और यहां से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा इस संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री श्रमिकों का एक प्रमुख प्रदाता है। भारतीय नाविक विभिन्न देशों के जहाजों पर काम करते हैं, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत सरकार के लिए एक प्राथमिकता है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि हाल के हमलों में भारतीय नागरिकों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि भारत ने ईरान के उप मिशन प्रमुख को तलब करने के बाद इस मामले पर एक बयान जारी किया। प्रवक्ता ने कहा कि भारत ने ईरानी पक्ष के सामने अपनी गहरी चिंता व्यक्त की और जो कुछ हुआ उसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने बताया कि इस घटना में भारत ने एक नागरिक को खो दिया है और कई भारतीय नागरिक घायल हुए हैं, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।

रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने इस मामले में ईरान के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और स्पष्ट किया है कि ऐसे हमले तुरंत रुकने चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि तनाव कम करने की आवश्यकता है और दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर आना चाहिए। संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाना ही पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता कायम करने का एकमात्र तरीका है।

खाड़ी में हमलों में भारतीय नाविकों की मौत

विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि खाड़ी में हुए हालिया हमलों में सबसे ज्यादा भारतीय नाविकों की मौत हुई है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों और नाविकों के बारे में जानकारी साझा करते हुए कहा कि हाल ही में जिन दो जहाजों पर हमला हुआ, उनमें कुल 30 भारतीय नाविक सवार थे। इनमें से एक जहाज पर 12 लोग सवार थे, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। दूसरे जहाज पर 18 भारतीय नाविक सवार थे, जिनमें से 9 गंभीर रूप से घायल हुए हैं, और इनमें से 2 की हालत गंभीर बताई गई है।

यह स्थिति भारतीय सरकार के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण महत्वपूर्ण है। भारतीय समुद्री उद्योग में नाविकों की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है, और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए। भारतीय नाविक न केवल भारत के लिए, बल्कि वैश्विक व्यापार और समुद्री परिवहन के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। उनकी सुरक्षा के बिना, वैश्विक व्यापार में रुकावट आ सकती है, जो सभी देशों की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है।

रणधीर जायसवाल ने कहा, "मैं यह भी बता सकता हूं कि सभी देशों के नागरिकों में भारतीय नाविकों ने वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों में सबसे ज्यादा मौत का सामना किया है। हालांकि, मैं गलत आंकड़े नहीं देना चाहता। क्षेत्र में हमारे कुल कितने जहाज हैं और कुल कितने लोग हताहत हुए हैं, इससे जुड़ी जानकारी मैं इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के खत्म होने के बाद साझा करूंगा।" यह स्पष्ट है कि इस प्रकार के हमले न केवल भारतीय नाविकों के लिए, बल्कि क्षेत्र की समग्र समुद्री सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय हैं।

पीओके में विरोध प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया

  • विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों पर भी प्रतिक्रिया दी। प्रवक्ता ने कहा कि ये प्रदर्शन पाकिस्तान की दशकों पुरानी व्यवस्था के तहत किए गए शोषण, लोगों के मौलिक अधिकारों से इनकार और अवैध व जबरन कब्जे वाले क्षेत्रों में किए जा रहे प्रशासनिक अत्याचार का सीधा नतीजा हैं।
  • उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की जायज समस्याओं का समाधान करने के बजाय पाकिस्तान सरकार ने अत्यधिक पुलिस बल का इस्तेमाल किया है। यह स्थिति न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी गंभीर खतरा है।
  • भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि पाकिस्तान को इन गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों और गलत कामों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार ठहराया जाए।

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर भारत का रुख

दक्षिण चीन सागर के मुद्दे पर, प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत का रुख स्पष्ट और पहले से चिर-परिचित है। उन्होंने बताया कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार समुद्री मार्गों और हवाई क्षेत्र से गुजरने की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर देता है। यह संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौते के अनुसार है। इसके अलावा, समुद्र के अन्य वैध उपयोग और बिना किसी बाधा के व्यापार को बनाए रखने की आवश्यकता पर भी भारत जोर देता है।

उन्होंने कहा कि समुद्री विवादों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून समझौते के अनुसार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दस साल पहले मध्यस्थता न्यायाधिकरण द्वारा दिया गया फैसला एक अहम पड़ाव है और संबंधित पक्षों के बीच विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का आधार है। इस प्रकार के विवादों का समाधान न केवल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए भी आवश्यक है।

विदेश मंत्री के खाड़ी देशों के दौरे पर जानकारी

  • विदेश मंत्री एस जयशंकर की खाड़ी देशों की यात्रा को लेकर रणधीर जायसवाल ने कहा कि विदेश मंत्री ने खाड़ी क्षेत्र के चार देशों का दौरा किया।
  • उन्होंने बताया कि इन चारों देशों कतर, कुवैत, बहरीन और ओमान में विदेश मंत्री ने वहां के नेतृत्व से व्यापक बातचीत की। यह बातचीत विभिन्न मुद्दों पर केंद्रित थी, जिनमें द्विपक्षीय संबंध, आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा शामिल हैं।

विदेश मंत्री की यह यात्रा भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खाड़ी देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देने का एक अवसर प्रदान करती है। खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नागरिकों की बड़ी संख्या है, जो भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है।

इस प्रकार, हाल के घटनाक्रमों को देखते हुए, भारतीय विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से अपनी चिंताओं को व्यक्त किया है और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहा है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण को प्राथमिकता दी जाए। यह न केवल भारत के लिए, बल्कि क्षेत्र की स्थिरता और सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।

भारतीय विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि भारत फारस की खाड़ी में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह न केवल भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत की यह नीति अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है, जो समुद्री विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए आवश्यक है।

आगे बढ़ते हुए, भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए, बल्कि क्षेत्रीय सहयोग और संवाद को भी बढ़ावा दे। यह न केवल भारतीय नागरिकों के लिए, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता के लिए आवश्यक है।

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