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कोरबा के आयुष्मान हॉस्पिटल में नवजात की मौत पर परिवार का हंगामा, डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 19, 2026, 06:05 PM IST
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कोरबा के आयुष्मान हॉस्पिटल में जुड़वा बच्चों में से एक की मौत के बाद परिजनों ने स्टाफ पर हमला किया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया है।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के शारदा विहार स्थित आयुष्मान हॉस्पिटल में हाल ही में एक गंभीर घटना सामने आई है, जिसमें नवजात जुड़वा बच्चों में से एक की मृत्यु हो गई। इस घटना ने न केवल परिवार में बल्कि पूरे समुदाय में हंगामा खड़ा कर दिया है। परिवार के सदस्यों ने अस्पताल के डॉक्टरों पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए अस्पताल में हंगामा किया। यह विवाद तब और बढ़ गया जब परिजनों ने अस्पताल के स्टाफ पर हमला करने का प्रयास किया, जिसके चलते स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बुलाना पड़ा।

परिवार के सदस्यों का आरोप है कि नवजात को पीलिया का सामना करना पड़ा, लेकिन डॉक्टरों ने समय पर उचित उपचार नहीं किया और न ही उसे किसी अन्य अस्पताल में रेफर किया। इस पर अस्पताल प्रबंधन ने अपनी सफाई में कहा कि उन्होंने समय पर रेफर करने का प्रयास किया था, लेकिन इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया जिससे यह साबित हो सके कि नवजात की स्थिति गंभीर थी।

जुड़वा बच्चों का जन्म 17 जुलाई को हुआ था। शशिकांत ओझा की पत्नी ने 14 साल के लंबे इंतजार के बाद जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। परिवार में बच्चों के जन्म से खुशी का माहौल था, लेकिन यह खुशी अब गहरे दुख में तब्दील हो गई है। जन्म के समय दोनों बच्चों का वजन सामान्य था, जिसमें एक बच्चे का वजन 2 किलो और दूसरे का वजन 2 किलो 700 ग्राम था। परिवार ने यह भी बताया कि जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद नसबंदी भी कराई गई थी। अब एक बच्चे की मौत हो चुकी है, जबकि दूसरे की हालत गंभीर बताई जा रही है।

परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने नवजात के पीलिया को गंभीरता से नहीं लिया। सुकन्या ओझा की ननद ने कहा कि जन्म के बाद बच्चे स्वस्थ थे, लेकिन अगले ही दिन बच्चे में पीलिया के लक्षण दिखाई देने लगे। जब उन्होंने डॉक्टरों को इस बारे में बताया, तो डॉक्टरों ने कहा कि सब कुछ सामान्य है। पीलिया की जानकारी देरी से दी गई, और जब बच्चे की स्थिति बिगड़ गई, तो उसे अस्पताल में उचित उपचार नहीं दिया गया।

सुकन्या ओझा की ननद ने अपने दुख को व्यक्त करते हुए कहा, "14 साल बाद हमारे इकलौते भाई के घर बच्चा हुआ था। जुड़वा बच्चे होने के बाद बच्चे बंद होने का ऑपरेशन (नसबंदी) भी करवा लिए। अब एक बच्चा नहीं रहा। दूसरे की हालत गंभीर है। ऐसे में हम क्या करेंगे।" इस बयान से स्पष्ट है कि परिवार इस घटना को लेकर कितनी दुखी और परेशान है।

अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नवजात की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही थी। अस्पताल के डायरेक्टर ज्योति श्रीवास्तव ने कहा कि पीलिया के लक्षण दिखते ही तुरंत इलाज शुरू किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति गंभीर होने पर ही बच्चे को रेफर किया गया था।

डायरेक्टर ने यह भी बताया कि सुकन्या ओझा तीन साल पहले अस्पताल में आई थीं। शादी के 14 साल बाद उन्हें संतान नहीं हुई थी, लेकिन उपचार के बाद वह गर्भवती हुईं और यहीं उनकी डिलीवरी हुई। जांच में पता चला कि बच्चे उल्टी स्थिति (ब्रीच पोजीशन) में थे। सावधानीपूर्वक डिलीवरी के बाद स्वस्थ जुड़वा बच्चों का जन्म हुआ। इनमें से एक बच्चे का वजन कम था, और उसे पीलिया था। अस्पताल में इसके इलाज की सुविधा नहीं थी, इसलिए उन्हें रेफर करने की सलाह दी गई।

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में व्यापक समस्याओं को भी उजागर करती है। कई बार अस्पतालों में मरीजों को समय पर उचित उपचार नहीं मिल पाता, जिससे गंभीर परिणाम सामने आते हैं। इस प्रकार की घटनाएं न केवल मरीजों के लिए बल्कि स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के लिए भी चिंता का विषय बन जाती हैं।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला अस्पताल में भी एक अन्य घटना हुई थी, जिसमें एक 20 साल की युवती की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि युवती के शरीर में खून की भारी कमी थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उसे 1 यूनिट ब्लड तक नहीं दिया। इस प्रकार की घटनाएं अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती हैं और यह दर्शाती हैं कि स्वास्थ्य सेवा में सुधार की आवश्यकता है।

इस घटना के बाद, परिवार के सदस्यों ने न्याय की मांग की है और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। अस्पताल प्रबंधन को भी अपनी प्रक्रियाओं और उपचार के मानकों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि मरीजों को बेहतर सेवा मिल सके।

इस घटना ने न केवल कोरबा जिले के अस्पतालों की सेवाओं पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और पहुंच को भी चुनौती दी है। परिवार के सदस्यों की भावनाएं, उनके दुःख और अस्पताल के खिलाफ उनकी नाराजगी इस बात का संकेत है कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता को देखते हुए, यह आवश्यक है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों की कार्यप्रणाली की समीक्षा करें। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी अस्पतालों में उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हों और मरीजों को समय पर और उचित उपचार मिल सके।

अंततः, यह घटना एक महत्वपूर्ण संकेत है कि हमें स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यह न केवल मरीजों के लिए बल्कि उनके परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।

इस मामले में आगे की कार्रवाई की आवश्यकता है। परिवार के सदस्यों ने न्याय की मांग की है और यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। अस्पताल प्रबंधन को भी अपनी प्रक्रियाओं और उपचार के मानकों की समीक्षा करनी चाहिए ताकि मरीजों को बेहतर सेवा मिल सके।

इस प्रकार की घटनाएं न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता पर सवाल उठाती हैं। यह दर्शाता है कि हमें स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित उपचार मिल सके।

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