चंडीगढ़: रिटायर्ड IPS की कोठी में मिली युवती की लाश, परिजन हत्या का आरोप लगाते हैं

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 18, 2026, 03:10 PM IST
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चंडीगढ़ में एक 18 वर्षीय युवती का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। परिजनों ने कोठी मालिक पर हत्या का आरोप लगाया और निष्पक्ष जांच की मांग की।

चंडीगढ़ के सेक्टर-10 स्थित एक कोठी में 18 वर्षीय एक युवती का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पाया गया है। यह कोठी गुजरात पुलिस के रिटायर IPS अधिकारी गुरिंदर सिंह की है। घटना शनिवार को हुई, जब स्थानीय पुलिस को सूचना मिली और वे तुरंत मौके पर पहुंच गए। शव को कब्जे में लेकर सेक्टर-16 स्थित सरकारी अस्पताल की मॉर्च्युरी में भेज दिया गया। यह मामला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि मृतका के परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया है।

मृतका की पहचान ताप्ती के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के गांव संतरी की निवासी थी। ताप्ती को एक सप्ताह पहले ही सेक्टर-10 की कोठी में घरेलू काम के लिए रखा गया था। उसके परिवार के अनुसार, उसे 20,000 रुपए मासिक वेतन देने का वादा किया गया था। यह घटना उन परिवारों के लिए चिंता का विषय है जो अपने बच्चों को बेहतर भविष्य के लिए काम पर भेजते हैं।

मृतका के परिजनों की चिंताएँ

ताप्ती के जीजा विकास ने बताया कि वह कोठी में 24 घंटे काम करने के लिए रखी गई थी और वहां रह रही थी। शुक्रवार रात करीब 11 बजे, ताप्ती ने अपनी बहन प्रियंका को फोन किया। उस फोन कॉल में उसने कहा कि उसका मन वहां नहीं लग रहा है और उसे परेशान किया जा रहा है। प्रियंका ने उसे समझाया कि अगर वह वहां अच्छा महसूस नहीं कर रही है, तो उसे सुबह काम छोड़कर घर लौट आना चाहिए। हालांकि, ताप्ती ने पूरी बात नहीं बताई और फोन कट गया। इसके बाद परिवार ने कई बार उसे फोन किया, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला।

यह स्थिति परिवार के लिए बेहद चिंताजनक थी, क्योंकि ताप्ती की अचानक चुप्पी ने उन्हें परेशान कर दिया। जब शनिवार सुबह करीब साढ़े 8 बजे कोठी में काम करने वाले ड्राइवर ने फोन किया और बताया कि ताप्ती ने आत्महत्या कर ली है, तो परिवार को और अधिक आश्चर्य हुआ। विकास ने ड्राइवर से स्पष्ट रूप से कहा था कि जब तक परिवार मौके पर नहीं पहुंचता, तब तक किसी भी सामान को हाथ न लगाया जाए और न ही शव को नीचे उतारा जाए।

जब परिवार सेक्टर-10 स्थित कोठी पर पहुंचा, तो उन्हें बताया गया कि ताप्ती का शव नहीं है और उसे सेक्टर-16 अस्पताल भेज दिया गया है। विकास ने सवाल उठाया कि जब परिवार ने साफ मना किया था कि शव को न छेड़ा जाए, तो फिर उसे नीचे क्यों उतारा गया और अस्पताल क्यों ले जाया गया? यह सवाल न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह मामले की पारदर्शिता पर प्रश्न उठाता है।

कोठी मालिक का पक्ष

कोठी की मालकिन अमृता ने पुलिस को दिए बयान में कहा कि उनके तीन साल की जुड़वां बच्चियाँ हैं। ताप्ती को उनकी देखभाल के लिए केयरटेकर के रूप में रखा गया था। अमृता ने बताया कि शनिवार सुबह ताप्ती अपने कमरे से बाहर नहीं निकली, इसलिए पहले उसे फोन किया गया। जब ताप्ती ने फोन नहीं उठाया, तो अमृता ने उसे आवाज दी, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद जब वह कमरे में गईं, तो ताप्ती को पंखे से लटका हुआ पाया। अमृता ने तुरंत 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी।

यहाँ पर यह भी ध्यान देने योग्य है कि अमृता ने यह भी कहा कि ताप्ती ने पहले कभी किसी तरह की समस्या की शिकायत नहीं की थी। यह बयान उस समय आया है जब परिवार हत्या का आरोप लगा रहा है। इस तरह के आरोपों के बीच, अमृता का यह कहना कि ताप्ती ने कभी कोई समस्या नहीं बताई, स्थिति को और अधिक जटिल बनाता है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सेक्टर-16 अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवा दिया है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फोरेंसिक साक्ष्य और अन्य जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई की दिशा और गति पर सभी की नज़रें होंगी, क्योंकि यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि सभी तथ्यों की सही तरीके से जांच की जाए।

परिजनों का कहना है कि उन्हें आत्महत्या की कहानी पर भरोसा नहीं है। उनका आरोप है कि ताप्ती के साथ कुछ गलत हुआ है और उसकी हत्या की गई है। उन्होंने कोठी मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इस घटना ने न केवल ताप्ती के परिवार को प्रभावित किया है, बल्कि पूरे समुदाय को भी चिंतित कर दिया है।

इस मामले के कई सामाजिक और कानूनी पहलू हैं। यह घटना उन परिवारों के लिए एक चेतावनी है जो अपने बच्चों को काम पर भेजते हैं। यह भी दिखाता है कि घरेलू काम के लिए काम करने वालों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की स्थिति कितनी संवेदनशील है। ऐसे मामलों में, जहां एक युवा लड़की की मौत होती है, यह आवश्यक है कि सभी पहलुओं की जांच की जाए और न्याय सुनिश्चित किया जाए।

घरेलू कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भारत में एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय है। अक्सर, इन महिलाओं को उनके काम के दौरान उत्पीड़न, शोषण और हिंसा का सामना करना पड़ता है। ताप्ती की मौत ने इस मुद्दे को फिर से उजागर किया है और यह आवश्यक है कि समाज इस पर गंभीरता से विचार करे।

इस घटना के बाद, चंडीगढ़ में घरेलू कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा फिर से उठने लगा है। यह एक ऐसा विषय है जिस पर समाज को गंभीरता से विचार करना चाहिए। कई बार, घरेलू काम करने वालों को उनके काम के दौरान उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, और इस मामले ने उन मुद्दों को उजागर किया है।

आगे की जांच और उसके परिणामों का सभी को इंतजार रहेगा। स्थानीय समुदाय, पुलिस और न्यायपालिका के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है, क्योंकि न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।

साथ ही, यह घटना यह भी दर्शाती है कि कैसे एक युवा जीवन की सुरक्षा और कल्याण की जिम्मेदारी केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग पर है। ताप्ती की कहानी उन कई लड़कियों की कहानी है जो बेहतर जीवन की तलाश में अपने गांवों को छोड़कर शहरों में आती हैं, लेकिन उन्हें अक्सर सुरक्षा और सम्मान की कमी का सामना करना पड़ता है।

अंत में, यह घटना न केवल ताप्ती के परिवार के लिए एक त्रासदी है बल्कि एक सामाजिक चेतना का भी संकेत है। यह समय है कि हम सभी एक साथ आएं और सुनिश्चित करें कि हमारे समाज में हर व्यक्ति को सुरक्षित और सम्मानित महसूस करने का अधिकार है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि ऐसी घटनाएँ फिर से न हों, हमें एकजुट होकर काम करना होगा और घरेलू कामकाजी महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करनी होगी।

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