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'19 दिन बाद भी सन्नाटा क्यों?', किरण राव ने सोनम वांगचुक के समर्थन में उठाए सवाल

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 17, 2026, 10:50 AM IST
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किरण राव ने सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का समर्थन करते हुए सरकार से प्रदर्शनकारियों से बातचीत की अपील की है।

Kiran Rao On Sonam Wangchuk: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की छात्रों के अधिकारों को लेकर जारी 19 दिन की भूख हड़ताल को अब बॉलीवुड से लगातार सपोर्ट मिल रहा है। आमिर खान, सोनाक्षी सिन्हा और फातिमा सना शेख के बाद अब फिल्ममेकर किरण राव भी उनके सपोर्ट में उतर आई हैं। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा, "मैं सोनम वांगचुक, अभिजीत दिपके, CJP और इस देश के उन सभी नागरिकों के साथ खड़ी हूं, जो छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे हैं। आप सभी ने हमें हमारी चुप्पी और उदासीनता से बाहर निकालने का काम किया है। हमें याद दिलाया है कि इस देश में हर आवाज मायने रखती है। इसके लिए पूरा देश आपका ऋणी है।"

Kiran Rao Post: सोनम वांगचुक के सपोर्ट में क्या बोलीं किरण राव?

किरण राव ने अपने पोस्ट में आगे लिखा, "यह देखकर बेहद दुख होता है कि 19 दिन बीत जाने के बाद भी इस भूख हड़ताल को लगभग पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है। आखिर सत्ता में बैठे लोग जनता की आवाज कब सुनेंगे? यह स्थिति चौंकाने वाली भी है और अमानवीय भी। सरकार को प्रदर्शन कर रहे लोगों से बातचीत शुरू करनी चाहिए, छात्रों की परेशानियों को समझना चाहिए और इस मुद्दे का समाधान निकालना चाहिए। हम नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है और हमारी आवाज सुनी जानी चाहिए।"

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Aamir Khan On Sonam Wangchuk: आमिर खान ने भी तोड़ी थी चुप्पी

इससे पहले आमिर खान ने भी सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि '3 इडियट्स' का फुनसुख वांगडू किरदार सोनम वांगचुक पर आधारित नहीं था और इसे लेकर लोगों के बीच गलतफहमी है। हालांकि उन्होंने सोनम वांगचुक के काम की सराहना करते हुए कहा था कि उनका सम्मान करने के लिए फिल्म से उनका जुड़ाव होना जरूरी नहीं है। आमिर ने उनकी सेहत को लेकर चिंता जताते हुए कहा था, "हम सभी उनकी सेहत और जिंदगी को लेकर चिंतित हैं। हम चाहते हैं कि सब कुछ अच्छे तरीके से खत्म हो और वह अपनी भूख हड़ताल समाप्त करके अपना ध्यान रखें।"

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सोनम वांगचुक, जो एक प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर हैं, ने अपनी भूख हड़ताल के माध्यम से छात्रों के अधिकारों और शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है। उनकी भूख हड़ताल का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में सुधार लाना और छात्रों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। वांगचुक ने कहा है कि छात्रों के साथ हो रहे अन्याय और शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ यह उनकी आवाज है।

सोनम वांगचुक के समर्थन में कई बॉलीवुड हस्तियों का आना एक महत्वपूर्ण संकेत है कि इस मुद्दे ने केवल छात्रों को ही नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न वर्गों को भी प्रभावित किया है। यह एक ऐसा मुद्दा है जो न केवल शिक्षा प्रणाली की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि छात्रों के भविष्य और उनके अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है। इस प्रकार, जब फिल्म उद्योग की प्रमुख हस्तियां इस मुद्दे पर बोलती हैं, तो यह समाज में जागरूकता फैलाने में मदद करती है।

किरण राव का यह बयान, जिसमें उन्होंने सरकार से बातचीत की मांग की है, यह दर्शाता है कि समाज के विभिन्न वर्गों को इस स्थिति के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। भूख हड़ताल जैसे कार्यों का उद्देश्य केवल ध्यान आकर्षित करना नहीं होता, बल्कि यह एक गंभीर मुद्दे पर चर्चा शुरू करना भी होता है। राव का यह कहना कि "हम नागरिकों को अपनी बात रखने का अधिकार है" यह दर्शाता है कि वे लोकतंत्र के मूल्यों को महत्वपूर्ण मानती हैं।

इस भूख हड़ताल के 19 दिन बीत जाने के बाद भी यदि सरकार इस पर ध्यान नहीं देती है, तो यह एक गंभीर चिंता का विषय है। यह न केवल छात्रों के अधिकारों के प्रति सरकार की उदासीनता को दर्शाता है, बल्कि यह लोकतंत्र में नागरिकों की आवाज की अनदेखी भी करता है। ऐसे में, यह आवश्यक है कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करे और छात्रों की समस्याओं को समझने के लिए उनके साथ संवाद स्थापित करे।

आमिर खान का वांगचुक के प्रति समर्थन भी महत्वपूर्ण है। आमिर खान, जो कि भारतीय सिनेमा के एक प्रमुख चेहरे हैं, ने अपने विचारों के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि वे छात्रों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील हैं। उनका यह कहना कि "हम सभी उनकी सेहत और जिंदगी को लेकर चिंतित हैं" यह दर्शाता है कि वे केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक भी हैं।

इस प्रकार, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और इस पर बॉलीवुड हस्तियों का समर्थन एक महत्वपूर्ण सामाजिक मुद्दे को उजागर करता है। यह दर्शाता है कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक साथ आकर छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठानी चाहिए। इस समय, जब शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है, ऐसे कार्य और समर्थन आवश्यक हैं ताकि सरकार और समाज दोनों इस दिशा में सकारात्मक कदम उठा सकें।

सोनम वांगचुक के कार्यों का प्रभाव केवल छात्रों के अधिकारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यापक सामाजिक सुधारों की दिशा में भी एक कदम है। उनकी भूख हड़ताल ने शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता को उजागर किया है और इसे एक राष्ट्रीय मुद्दा बना दिया है। जब समाज के विभिन्न वर्ग इस मुद्दे पर एकजुट होते हैं, तो यह सरकार पर दबाव डालता है कि वह इस दिशा में कदम उठाए।

कुल मिलाकर, किरण राव, आमिर खान और अन्य बॉलीवुड हस्तियों का समर्थन सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को एक महत्वपूर्ण सामाजिक आंदोलन में बदल रहा है। यह केवल छात्रों के अधिकारों की बात नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक संदेश है कि हमें एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए। इस प्रकार, यह आंदोलन न केवल शिक्षा प्रणाली को प्रभावित करेगा, बल्कि यह समाज के अन्य मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित करने का एक अवसर प्रदान करेगा।

भारत में शिक्षा प्रणाली की स्थिति हमेशा से चर्चा का विषय रही है। शिक्षा के अधिकार को संविधान में एक मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई है, लेकिन इसके कार्यान्वयन में कई चुनौतियाँ हैं। शैक्षणिक संस्थानों में भ्रष्टाचार, अनियमितताएँ और छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन जैसे मुद्दे समय-समय पर सामने आते रहे हैं। ऐसे में, सोनम वांगचुक जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं का संघर्ष महत्वपूर्ण है।

सोनम वांगचुक का नाम भारतीय शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उनकी सक्रियता और उनके अनोखे तरीके के लिए जाना जाता है। उन्होंने न केवल छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठाई है, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के लिए भी काम किया है। उनकी भूख हड़ताल का उद्देश्य छात्रों की समस्याओं को उजागर करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना है।

इस भूख हड़ताल के दौरान, वांगचुक ने छात्रों की आवाज को उठाने का प्रयास किया है, जो अक्सर अनसुनी रह जाती है। उनका यह कदम न केवल छात्रों के लिए, बल्कि समाज के अन्य वर्गों के लिए भी प्रेरणादायक है। यह दर्शाता है कि जब लोग एकजुट होते हैं, तो वे महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं।

किरण राव और आमिर खान जैसे बॉलीवुड सितारों का समर्थन इस आंदोलन को और भी महत्वपूर्ण बनाता है। जब समाज के प्रभावशाली लोग किसी मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते हैं, तो यह उस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना देता है। इससे सरकार पर दबाव बढ़ता है कि वह इस मुद्दे को गंभीरता से ले और छात्रों की समस्याओं का समाधान करे।

इस प्रकार, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल केवल एक व्यक्तिगत प्रयास नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का हिस्सा है। यह आंदोलन शिक्षा प्रणाली में सुधार, छात्रों के अधिकारों की रक्षा और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। जब समाज के विभिन्न वर्ग एकजुट होते हैं, तो वे न केवल अपने अधिकारों के लिए लड़ सकते हैं, बल्कि वे एक बेहतर भविष्य की दिशा में भी कदम बढ़ा सकते हैं।

भविष्य में, यह आवश्यक है कि हम सभी इस प्रकार के आंदोलनों का समर्थन करें और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए एकजुट हों। सोनम वांगचुक का संघर्ष केवल छात्रों के अधिकारों के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा है। यह हमें याद दिलाता है कि हम सभी को अपनी आवाज उठाने का अधिकार है और हमें इसे प्रयोग में लाना चाहिए।

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