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बिहार में बिजली की भरपूर उपलब्धता फिर भी कटौती का संकट

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 14, 2026, 12:00 PM IST
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बिहार में बिजली की कोई कमी नहीं होने के बावजूद कई जिलों में कटौती से लोग परेशान हैं। तकनीकी खराबियों और मौसम की वजह से रोजाना हजारों शिकायतें आ रही हैं।

बिहार में बिजली की उपलब्धता का मामला पिछले कुछ समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। राज्य में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता होने के बावजूद, आंधी-बारिश और स्थानीय तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उपभोक्ताओं को कटौती का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति विशेष रूप से गर्मियों के महीनों में अधिक चिंता का विषय बन जाती है, जब तापमान बढ़ने के कारण बिजली की मांग में भी वृद्धि होती है।

पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में औसतन दो से छह घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है। इस प्रकार की कटौती से न केवल घरेलू जीवन प्रभावित होता है, बल्कि उद्योगों और व्यवसायों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। बिजली कटौती की समस्या के पीछे स्थानीय फॉल्ट और तकनीकी खराबियों का होना एक बड़ी वजह है। इन समस्याओं को हल करने में घंटों लग जाते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को उमस भरी गर्मी में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

बिजली विभाग के अनुसार, इस वर्ष 4 जुलाई को पीक आवर में 9,155 मेगावाट की अधिकतम बिजली आपूर्ति की गई थी। विभाग का यह भी दावा है कि 10,000 मेगावाट से अधिक मांग होने पर भी किसी प्रकार की आपूर्ति में बाधा नहीं आई है। हालांकि, आंधी-तूफान के कारण कई स्थानों पर तार टूटने और ट्रांसफार्मर जलने की घटनाएं बढ़ गई हैं। बिजली कंपनियों ने यह भी बताया है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार, किसानों को धान की रोपाई के लिए विशेष फीडर से दिन में 12 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है।

उत्तर बिहार में उपभोक्ताओं की परेशानियां

उत्तर बिहार के उपभोक्ताओं की स्थिति भी चिंताजनक है। पश्चिम चंपारण के बेतिया और बगहा में औसतन 18 से 20 घंटे बिजली मिल रही है, जबकि सीतामढ़ी में शहरी क्षेत्रों को 17 से 18 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 16 से 17 घंटे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। पूर्वी चंपारण के मोतिहारी, मधुबनी और समस्तीपुर में 33 केवी और 11 केवी लाइनों में फॉल्ट, लो वोल्टेज और बढ़ते लोड के कारण बार-बार बिजली की आपूर्ति में बाधा आ रही है।

कोसी, सीमांचल और पूर्वी बिहार की स्थिति

कोसी, सीमांचल और पूर्वी बिहार के अधिकांश जिलों में भी बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है। इन क्षेत्रों में तीन से चार घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है। सुपौल, पूर्णिया, बांका और दरभंगा में बारिश और तेज हवा के कारण फॉल्ट की घटनाएं बढ़ रही हैं। सहरसा में फ्यूज उड़ने और मधेपुरा में स्थानीय फॉल्ट के कारण बिजली कट रही है। जमुई में बार-बार ट्रिपिंग, लखीसराय में पेड़ों के संपर्क में आने से तार टूटने और शॉर्ट सर्किट की घटनाएं देखी जा रही हैं। मुंगेर में लगातार बिजली कट रही है, जबकि खगड़िया में दो से तीन घंटे की बाधा उत्पन्न हो रही है। भागलपुर के पीरपैंती, सुल्तानगंज, नाथनगर और अलीगंज के कई फीडरों में मेंटेनेंस के कारण भी तीन से चार घंटे तक बिजली की कटौती हो रही है।

गोपालगंज और बक्सर में कटौती की स्थिति

गोपालगंज में बारिश के कारण उपकरणों के खराब होने के चलते उपभोक्ताओं को पांच से छह घंटे बिजली की कटौती का सामना करना पड़ रहा है। सारण में प्रतिदिन औसतन तीन घंटे बिजली बाधित रह रही है। स्थानीय फॉल्ट के कारण नवादा, नालंदा और रोहतास में एक से ढाई घंटे तक बिजली की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। वैशाली में रोजाना ढाई से तीन घंटे बिजली की कटौती हो रही है। गया जी में पिछले कुछ दिनों से चार से पांच घंटे की कटौती हो रही है। बेगूसराय में शहरी क्षेत्रों में दो घंटे और ग्रामीण इलाकों में करीब चार घंटे बिजली कट रही है। बक्सर के शहरी क्षेत्रों में दो घंटे और ग्रामीण इलाकों में चार घंटे की कटौती हो रही है।

शिकायतों की बढ़ती संख्या

राज्यभर से बिजली विभाग के कॉल सेंटर पर रोजाना औसतन 30,000 से 40,000 कॉल आ रही हैं। इनमें लगभग 9,000 शिकायतें बिजली कटने, फ्यूज कॉल और ट्रांसफार्मर जलने की होती हैं। फीडर ओवरलोड होने से फ्यूज कॉल की संख्या में वृद्धि हो रही है। फ्यूज कॉल की मरम्मत के कारण भी तीन-चार घंटे तक आपूर्ति बाधित होती है। यह स्थिति उपभोक्ताओं के लिए निराशाजनक है और उनके दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही है।

बिहार में बिजली की कटौती की समस्या केवल तकनीकी खराबियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक प्रणालीगत समस्या का हिस्सा है। राज्य में बिजली की मांग और आपूर्ति के बीच का अंतर, बुनियादी ढांचे की कमी, और मौसम के कारण होने वाली समस्याएं सभी मिलकर इस स्थिति को जटिल बनाती हैं।

राज्य सरकार और बिजली कंपनियों के लिए यह आवश्यक है कि वे इस समस्या का समाधान करने के लिए ठोस कदम उठाएं। उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों और समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, बिजली कंपनियों को अपने बुनियादी ढांचे को सुधारने, तकनीकी समस्याओं को समय पर हल करने और उपभोक्ताओं के साथ बेहतर संवाद स्थापित करने की आवश्यकता है।

यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह न केवल उपभोक्ताओं के लिए बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति के लिए भी गंभीर परिणाम हो सकता है। बिजली की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना, विकास और औद्योगीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है, और इसके बिना बिहार की प्रगति प्रभावित हो सकती है। इसलिए, यह समय है कि संबंधित विभाग इस दिशा में ठोस और प्रभावी कदम उठाएं ताकि राज्य के लोगों को बिजली की स्थिर और निर्बाध आपूर्ति मिल सके।

बिजली की कटौती के इस संकट को समझने के लिए, यह आवश्यक है कि हम बिहार की बिजली उत्पादन और वितरण प्रणाली की गहराई में जाएं। बिहार में बिजली उत्पादन की क्षमता बढ़ाने के लिए पिछले कुछ वर्षों में कई प्रयास किए गए हैं। राज्य सरकार ने नई बिजली परियोजनाओं की शुरुआत की है, जिनमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और पारंपरिक ऊर्जा स्रोत शामिल हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं की प्रगति धीमी रही है, जिसके चलते राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पाई है।

बिहार में बिजली वितरण का ढांचा भी चुनौतीपूर्ण है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की पहुंच अभी भी सीमित है, और शहरी क्षेत्रों में भी वितरण नेटवर्क में खामियां हैं। इसके अलावा, बिजली चोरी और अवैध कनेक्शन जैसी समस्याएं भी वितरण प्रणाली को प्रभावित कर रही हैं। ये सभी कारक मिलकर बिहार में बिजली की कटौती की समस्या को और बढ़ा रहे हैं।

बिजली विभाग ने इस स्थिति को सुधारने के लिए कई उपाय किए हैं, लेकिन इन उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहे हैं। उपभोक्ताओं को भरोसा दिलाने के लिए, बिजली कंपनियों को अपनी सेवाओं में सुधार लाने, नियमित मेंटेनेंस करने, और तकनीकी समस्याओं को जल्दी सुलझाने की आवश्यकता है। इसके अलावा, उपभोक्ताओं के साथ संवाद को बढ़ाना भी जरूरी है ताकि वे अपनी समस्याओं को सही समय पर बता सकें और समाधान मिल सके।

इस स्थिति का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि बिजली कटौती का प्रभाव केवल उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ता, बल्कि यह राज्य की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डालता है। उद्योगों और व्यवसायों के लिए निरंतर बिजली की आपूर्ति आवश्यक है, और जब बिजली की कटौती होती है, तो यह उत्पादन और सेवाओं में रुकावट पैदा करती है। इससे न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि रोजगार के अवसर भी सीमित होते हैं।

अंततः, बिहार में बिजली की कटौती की समस्या एक जटिल मुद्दा है, जिसके समाधान के लिए समग्र दृष्टिकोण की आवश्यकता है। सरकार, बिजली कंपनियों और उपभोक्ताओं को मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा, ताकि सभी के लिए एक स्थायी और विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

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