JPSC विवाद: CID ने पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते के घर पर छापा

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 23, 2026, 04:23 PM IST
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JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में अनियमितताओं की जांच में CID ने पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते के आवास पर छापा मारा है।

Ranchi News: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं और धांधली के आरोपों की जांच अब निर्णायक दौर में पहुंचती दिख रही है. गुरुवार को अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की टीम ने JPSC के निवर्तमान अध्यक्ष और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव एल खियांग्ते के कांके रोड स्थित आवास पर छापेमारी की. इस कार्रवाई को परीक्षा विवाद की जांच में अब तक की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है.

पुलिस बल के साथ पहुंची CID की टीम

जानकारी के अनुसार, गुरुवार सुबह CID की टीम पर्याप्त पुलिस बल के साथ एल खियांग्ते के आवास पर पहुंची. टीम ने घर के भीतर मौजूद विभिन्न दस्तावेजों, फाइलों और रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू की. जांच अधिकारी JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों का मिलान कर रहे हैं और उन रिकॉर्ड को खंगाल रहे हैं, जिनका संबंध परीक्षा प्रक्रिया, प्रशासनिक निर्णयों और चयन प्रक्रिया से हो सकता है. हालांकि, छापेमारी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री बरामद हुई है, इसे लेकर CID की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.

14वीं सिविल सेवा परीक्षा की जांच तेज

JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर लंबे समय से अनियमितताओं, धांधली और चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे थे. अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों द्वारा लगातार शिकायतें दर्ज कराए जाने के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया. इसके बाद जांच की जिम्मेदारी CID को सौंपी गई. CID ने बुधवार को इस मामले में औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की. इस प्रकरण में कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया गया है. एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसी ने विभिन्न स्तरों पर साक्ष्य जुटाने और संबंधित लोगों से पूछताछ का सिलसिला तेज कर दिया है.

अब तक पांच लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

जांच के दौरान CID अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारियों, तकनीकी सहयोगियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की भी बारीकी से जांच कर रही है. अधिकारियों का मानना है कि दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच से कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं. यह गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि जांच एजेंसी इस मामले में गंभीरता से आगे बढ़ रही है और किसी भी स्तर पर अनियमितताओं को उजागर करने के लिए प्रतिबद्ध है.

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आगे और बड़े खुलासों की उम्मीद

पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते के आवास पर हुई छापेमारी के बाद JPSC परीक्षा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है. माना जा रहा है कि जांच एजेंसी को यदि महत्वपूर्ण दस्तावेज या डिजिटल साक्ष्य मिलते हैं तो मामले में कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं. जांच के दायरे में परीक्षा से जुड़े निर्णय, प्रशासनिक प्रक्रियाएं और संभावित जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका भी शामिल है. फिलहाल, CID की कार्रवाई जारी है और एजेंसी पूरे मामले की हर पहलू से जांच कर रही है. आने वाले दिनों में बरामद दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड और पूछताछ के आधार पर इस बहुचर्चित मामले में और भी अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है.

JPSC और उसकी भूमिका

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) का गठन राज्य में सरकारी सेवाओं के लिए योग्य उम्मीदवारों का चयन करने के लिए किया गया था. आयोग का उद्देश्य पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है, ताकि योग्य और सक्षम उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों में नियुक्त किया जा सके. लेकिन जब से 14वीं सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन हुआ है, तब से इस आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं. अभ्यर्थियों और उनके समर्थकों का आरोप है कि परीक्षा में घोटाले और धांधली के कारण कई योग्य उम्मीदवारों को न्याय नहीं मिला है. यह स्थिति आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न उठाती है और इसके सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है.

समाज में प्रतिक्रिया

JPSC परीक्षा विवाद ने झारखंड के युवाओं और अभ्यर्थियों के बीच व्यापक आक्रोश पैदा किया है. कई छात्र संगठनों ने इस मामले को लेकर प्रदर्शन किया है और सरकार से मांग की है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए. कई अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया है कि परीक्षा के दौरान कुछ उम्मीदवारों को विशेष लाभ दिया गया, जबकि अन्य को अनदेखा किया गया. इस स्थिति ने परीक्षा के परिणामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. समाज में इस मुद्दे को लेकर गहरी चिंता और असंतोष का माहौल है, जो भविष्य में सरकारी सेवाओं की चयन प्रक्रिया के प्रति विश्वास को प्रभावित कर सकता है.

भविष्य की संभावनाएँ

CID की जांच के परिणामों पर सभी की निगाहें हैं. यदि जांच में कोई भी गंभीर अनियमितता या भ्रष्टाचार का प्रमाण मिलता है, तो इससे न केवल संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, बल्कि JPSC की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठेंगे. इससे आयोग की साख को नुकसान पहुंचेगा और भविष्य में आयोग के कामकाज में सुधार की आवश्यकता महसूस की जाएगी. ऐसे में यह संभावना है कि राज्य सरकार आयोग के कार्यों की समीक्षा कर सकती है और आवश्यक सुधारात्मक कदम उठा सकती है. यह एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है, जो न केवल JPSC के लिए, बल्कि झारखंड में सरकारी सेवाओं के चयन प्रक्रिया के लिए भी महत्वपूर्ण होगा.

निष्कर्ष

JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में हुई अनियमितताओं की जांच एक गंभीर मुद्दा बन चुकी है, जो न केवल परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है, बल्कि झारखंड में सरकारी सेवाओं की चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता को भी चुनौती दे रही है. CID की कार्रवाई और जांच के परिणामों का सभी को बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि क्या JPSC की प्रणाली में वास्तव में कोई खामी है या यह सिर्फ एक आरोप है. आने वाले दिनों में इस मामले में और भी कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं, जो झारखंड के युवाओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं. इस संदर्भ में, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार और आयोग इस मुद्दे को हल करने के लिए ठोस कदम उठाते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके और युवाओं का विश्वास बहाल किया जा सके.

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