बिहार विधानमंडल में शिक्षकों की कमी पर जदयू विधायक का सवाल, सीएम सम्राट चौधरी ने दिया जवाब

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 21, 2026, 11:59 AM IST
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बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र के दूसरे दिन जदयू विधायक ने आंबेडकर स्कूल में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया, जिस पर सीएम सम्राट चौधरी को जवाब देना पड़ा।

बिहार विधानमंडल में शिक्षकों की कमी पर जदयू विधायक का सवाल, सीएम सम्राट चौधरी ने दिया जवाब

बिहार विधानमंडल के मानसून सत्र का आज दूसरा दिन है। इस सत्र में विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने का प्रयास किया। सदन के अंदर जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के विधायक श्याम रजक ने आंबेडकर स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया। यह मुद्दा शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बना हुआ है, खासकर तब जब शिक्षा का अधिकार हर नागरिक का है। श्याम रजक ने इंदिरा आंबेडकर विद्यालय में शिक्षकों की कमी का जिक्र करते हुए कहा कि इन स्कूलों में 62 फीसदी शिक्षकों की कमी है। यह आंकड़ा न केवल चिंताजनक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार की कितनी आवश्यकता है।

शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। शिक्षक ही छात्रों को ज्ञान प्रदान करते हैं और उनके भविष्य को आकार देते हैं। जब शिक्षकों की कमी होती है, तो यह न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि छात्रों के समग्र विकास पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है। बिहार में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। राज्य सरकार ने शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं, लेकिन इन योजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए उचित संख्या में शिक्षकों की आवश्यकता होती है।

इस पर बिहार सरकार के अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने जानकारी दी कि शिक्षकों की भर्ती को लेकर बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को अधियाचना भेजी गई है। यह कदम शिक्षकों की कमी को दूर करने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा कि यह एक अति गंभीर मामला है। उन्होंने सदन में उपस्थित सदस्यों की चिंता को गंभीरता से लिया और शिक्षा विभाग को इस मामले की मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया। सम्राट चौधरी ने यह भी भरोसा दिया कि एक महीने के अंदर शिक्षकों की बहाली पूरी कर ली जाएगी। यह आश्वासन शिक्षकों की कमी के मुद्दे को लेकर सरकार की तत्परता को दर्शाता है।

राज्य के शिक्षा मंत्री ने सदन के अंदर जानकारी दी है कि जुलाई के अंतिम सप्ताह में बीपीएससी को TRE-4 का प्रस्ताव भेजा जाएगा। यह प्रस्ताव शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने का यह निर्णय कई वर्षों से लंबित मुद्दों को हल करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

वहीं, सदन के बाहर विपक्षी सदस्य सरकार पर तीखे हमले करते नजर आए। मॉडल स्कूलों को भगवा रंग से रंगने के मुद्दे पर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार के पास स्कूलों में शौचालय बनाने के लिए पैसा नहीं है, लेकिन भगवाकरण पर जोर दिया जा रहा है। यह सवाल उठाता है कि क्या सरकार प्राथमिकता के मामलों में सही निर्णय ले रही है। इस प्रकार के मुद्दे आम जनता के बीच सरकार की छवि को प्रभावित कर सकते हैं। शिक्षा के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता भी सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।

साथ ही, सीपीआई विधायक अजय कुमार ने कानून व्यवस्था के खिलाफ पोस्टर लेकर विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य बिहार में बढ़ती अपराध दर और कानून व्यवस्था की स्थिति को उजागर करना था। बिहार में अपराध की बढ़ती घटनाएं समाज में भय का माहौल पैदा कर रही हैं। विधायक अजय कुमार का यह प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि राजनीतिक दलों के बीच कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर गहरी चिंता है। कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने भी सरकार पर आरोप लगाया कि राम मंदिर के चंदे, वोट चोरी और पेपर लीक जैसे मामलों पर केंद्र सरकार चुप है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों के अधिकारों की आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा है। यह घटनाक्रम दर्शाता है कि विभिन्न राजनीतिक दलों के बीच शिक्षा और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर गहरी चिंता है।

शिक्षकों की कमी और कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सदन में चर्चा के साथ-साथ, अन्य विधेयकों पर भी चर्चा की गई। सोमवार को बिहार विधानमंडल में 7 विधेयकों की प्रतियां बांटी गईं। सम्राट चौधरी सरकार इन विधेयकों को लाने के लिए बेहद गंभीर है। इनमें भारतीय स्टांप (बिहार संशोधन) विधेयक 2026, बिहार जुआ (प्रतिबंध) विधेयक 2026, बिहार नगर विकास विधेयक 2026, बिहार भूमि दाखिल-खारिज (संशोधन) विधेयक, बिहार दुकान और प्रतिष्ठान (रोजगार विनियमन एवं सेवा शर्त) अधिनियम 2026 विधेयक, बिहार निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026, और बिहार चिकित्सा (संशोधन) विधेयक, 2026 एवं बिहार नर्सेज पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 शामिल हैं।

बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने कहा है कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को प्राथमिकता दे रही है। दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार द्वारा विशेष अनुदान दिया जा रहा है। सौर ऊर्जा संयंत्र योजना को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका दूरगामी प्रभाव होगा। यह कृषि क्षेत्र के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि बिहार की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है।

परिषद के 213वें सत्र के पहले दिन संबोधन में सभापति ने कहा कि बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार अधिक संवेदनशील है। केंद्रीय विद्यालय खोलने को जमीन दिए जा रहे हैं। विक्रमशिला विवि के लिए 200 एकड़ भूमि हस्तांरित की गई है। 211 डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कर दी गई है। एम्स पटना का विस्तारीकरण हो रहा है। यह सभी कदम शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की दिशा में उठाए गए हैं।

मॉडल स्कूलों को भगवा रंग से रंगने के मुद्दे पर RJD विधायक ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि सरकार के पास स्कूलों में शौचालय बनवाने के लिए पैसा नहीं है लेकिन भगवाकरण पर जोर दिया जा रहा है। यह दर्शाता है कि सरकार के प्राथमिकता के मामलों में असंतुलन है।

राष्ट्रीय जनता दल के सदस्यों ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर भी विधानसभा परिसर में प्रदर्शन किया है। सदन के सदस्यों के हाथों में पोस्टर-बैनर थे जिसपर स्लोगन लिखे गए थे कि 'हत्या में नंबर-1 बिहार, अपराध में नंबर-1 बिहार।' यह प्रदर्शन बिहार में बढ़ते अपराध की स्थिति को उजागर करता है और सरकार से जवाबदेही की मांग करता है।

बिहार विधानसभा परिसर में AIMIM के सदस्यों ने प्रदर्शन किया है। एआईएमआईएम के सदस्यों ने बाढ़ से बिहार में होने वाली तबाही, खराब सड़क और टूटे पुल का मुद्दा उठाया। विपक्षी सदस्यों के हाथ में पोस्टर भी थे। यह प्रदर्शन भी सरकार की बुनियादी ढांचे की कमी और नागरिकों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही को उजागर करता है।

राज्य में लागू 159 साल पुराने सार्वजनिक जुआ अधिनियम 1867 की जगह बिहार सरकार नया बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक 2026 ला रही है। अब पुलिस को ऑफलाइन जुआघर, सट्टेबाजी के साथ ऑनलाइन जुआ और बेटिंग वेबसाइट-एप पर प्रतिबंध लगाते हुए कार्रवाई का अधिकार मिलेगा। सार्वजनिक स्थल पर जुआ खेलते पकड़े जाने पर पुलिस बिना वारंट तलाशी लेने के साथ ही आरोपियों को गिरफ्तार कर सकेगी। यह विधेयक बिहार में जुए के बढ़ते मामलों पर नियंत्रण पाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बिहार विधानमंडल में चल रही यह चर्चा और प्रदर्शन इस बात का संकेत है कि राज्य की राजनीति में शिक्षा, कानून व्यवस्था, और बुनियादी ढांचे के मुद्दे एक प्रमुख स्थान रख रहे हैं। सरकार के सामने इन मुद्दों का समाधान करना एक चुनौती है, और इससे राज्य की राजनीतिक स्थिरता और विकास पर भी प्रभाव पड़ेगा।

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