केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा से मुलाकात की, जिसमें बाढ़ राहत और कृषि योजनाओं पर चर्चा हुई।
गुवाहाटी, भारत 25 अग॰ 2026 ALN: नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मंगलवार को कृषि भवन में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्व सरमा ने मुलाकात की। इस बैठक का उद्देश्य असम में बाढ़ से हुए नुकसान, किसानों की समस्याओं और कृषि एवं ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति पर चर्चा करना था।
असम, जो कि भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित है, हर साल बाढ़ की समस्या का सामना करता है। यह समस्या विशेष रूप से मानसून के दौरान अधिक गंभीर हो जाती है, जब तेज बारिश के कारण नदियों का जल स्तर बढ़ जाता है। राज्य की भौगोलिक स्थिति और नदियों की घनी नेटवर्किंग के कारण, बाढ़ का प्रभाव व्यापक होता है। असम की प्रमुख नदियों में ब्रह्मपुत्र, बराक और उनकी सहायक नदियाँ शामिल हैं, जो बाढ़ के दौरान अत्यधिक जल स्तर के कारण गंभीर संकट उत्पन्न करती हैं। इस बार भी बाढ़ ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया है, जिसके चलते सरकार ने राहत कार्यों के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है।
केंद्र ने बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत करीब 5,000 करोड़ रुपये की आवासीय स्वीकृतियों से संबंधित पत्र मुख्यमंत्री को सौंपे। यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है। बाढ़ से प्रभावित मकानों का सर्वे पूरा होने के बाद पात्र परिवारों को नए मकानों की मंजूरी दी जाएगी। इस सर्वे की अवधि को 15 दिन बढ़ाया गया है, जिससे अधिक से अधिक प्रभावित परिवारों की पहचान की जा सके। प्रारंभिक आकलन में 26,681 मकानों के प्रभावित होने और करीब 480 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
चाय बागान श्रमिकों को भी आवास योजना का लाभ दिलाने के लिए विशेष सर्वे विंडो खोली जाएगी। असम में चाय बागान श्रमिकों की संख्या काफी अधिक है, और उनके लिए आवास की उपलब्धता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बाढ़ के कारण चाय बागान भी प्रभावित हुए हैं, जिससे श्रमिकों की आजीविका पर संकट आया है। चाय उद्योग असम की अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस क्षेत्र में बाढ़ के प्रभाव को कम करने के लिए ठोस कदम उठाना आवश्यक है। इस योजना के तहत उन्हें आवास उपलब्ध कराने से उनके जीवन स्तर में सुधार होगा।
बाढ़ प्रभावित किसानों के लिए भी राहत कार्यों की योजना बनाई गई है। किसानों को फसल नुकसान की भरपाई, अतिरिक्त बीज और कृषि सामग्री उपलब्ध कराने पर भी सहमति बनी है। यह कदम किसानों को पुनः अपने पैरों पर खड़े होने में मदद करेगा। कृषि क्षेत्र में पुनर्निर्माण और विकास के लिए यह आवश्यक है कि किसानों को सही समय पर सहायता मिले, ताकि वे अगली फसल की बुवाई कर सकें। इसके अलावा, सरकार ने फसल बीमा योजनाओं को भी सक्रिय रूप से लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे किसानों को प्राकृतिक आपदाओं के समय आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
कृषि क्षेत्र में 2026-27 के लिए राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत असम को 832.7 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसमें 553 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता के रूप में शामिल हैं। यह आवंटन कृषि विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है और इससे राज्य के कृषि क्षेत्र में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। कृषि मशीनीकरण के लिए 33.36 करोड़ रुपये और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सब्जी उत्पादन, कोल्ड स्टोरेज व फूड प्रोसेसिंग के लिए 96.87 करोड़ रुपये की कार्ययोजना मंजूर की गई है। यह योजनाएं न केवल बाढ़ के बाद की स्थिति को सुधारने में मदद करेंगी, बल्कि राज्य की कृषि उत्पादकता को भी बढ़ाएंगी।
इसके अलावा, सुरक्षित खेती के लिए 1,500 नए बांस पॉलीहाउस भी स्वीकृत किए गए हैं। बांस पॉलीहाउस का उपयोग खेती में किया जाता है, जो फसलों को सुरक्षित रखने में मदद करता है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से बचाता है। यह न केवल फसलों की सुरक्षा करता है, बल्कि किसानों को बेहतर उपज भी प्रदान करता है। जलवायु परिवर्तन के कारण कृषि पर पड़ने वाले प्रभावों के मद्देनजर, इस तरह की तकनीकों का विकास अत्यंत आवश्यक है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बैठक में आश्वासन दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असम के विकास और बाढ़ प्रभावित लोगों की सहायता के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। यह बयान इस बात का संकेत है कि केंद्र सरकार असम के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से ले रही है और बाढ़ राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि सरकार बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों में दीर्घकालिक समाधान खोजने के लिए गंभीर है।
असम में बाढ़ राहत कार्यों के लिए यह आवासीय मंजूरी न केवल बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए राहत का एक स्रोत है, बल्कि यह राज्य के विकास के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम है। इन उपायों से असम के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा, और उन्हें अपने भविष्य के प्रति आश्वस्त होने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही, यह कदम राज्य के आर्थिक विकास में भी सहायक सिद्ध होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
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