अभिजीत दिपके का दावा- वांगचुक पर हमले की कोशिश हुई: पत्थर फेंका; 21वें दिन अनशन, ऋतिक रोशन ने समर्थन में सोशल मीडिया पर पोस्ट किया

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 18, 2026, 01:52 AM IST
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कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने वांगचुक पर हमले की कोशिश का दावा किया है। ऋतिक रोशन ने भी अनशन के समर्थन में पोस्ट किया।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दिपके ने हाल ही में एक गंभीर आरोप लगाया है कि जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर हमला करने की कोशिश की गई। यह घटना उस समय हुई जब वांगचुक अपनी भूख हड़ताल के 21वें दिन को मनाने के लिए वहां उपस्थित थे। दिपके के अनुसार, कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने वांगचुक की ओर पत्थर फेंका, लेकिन सौभाग्यवश उन्हें कोई चोट नहीं आई। यह घटना न केवल वांगचुक के लिए बल्कि उनके समर्थकों के लिए भी चिंता का विषय बन गई है।

दिपके ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में इस घटना के बारे में चेतावनी दी थी कि प्रदर्शन को रोकने के लिए कुछ लोग भेजे जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पुलिस के अंदरूनी सूत्रों से इस बात की जानकारी मिली थी। दिपके का मानना है कि यदि वांगचुक को कुछ हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। यह टिप्पणी इस बात को दर्शाती है कि प्रदर्शनकारियों के जीवन की सुरक्षा को लेकर उनके मन में गहरी चिंता है।

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक, जो कि शिक्षा सुधारों के लिए जाने जाते हैं, ने 21 दिनों से भूख हड़ताल की हुई है। उनकी भूख हड़ताल का उद्देश्य पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करना है। वांगचुक के समर्थन में कई लोग आए हैं, जिनमें बॉलीवुड अभिनेता ऋतिक रोशन भी शामिल हैं। रोशन ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें छात्रों के मानसिक तनाव का एहसास तब हुआ जब उन्होंने अपनी एक फिल्म में शिक्षक का किरदार निभाया। यह समर्थन वांगचुक और उनके आंदोलन को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।

डॉक्टरों के अनुसार, वांगचुक की भूख हड़ताल के कारण उनका वजन अब तक लगभग 9.5 किलो घट चुका है। हाल ही में, उनका वजन 350 ग्राम और कम होकर 56.55 किलो रह गया था। यह स्थिति उनकी सेहत के लिए गंभीर चिंता का विषय है और यह दर्शाती है कि भूख हड़ताल का प्रभाव उनके स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

वांगचुक के साथ भूख हड़ताल पर अन्य समर्थक भी हैं, जैसे आईसा की नेहा, आमीन और मनीष। इनमें से नेहा को गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के कारण अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी गई है, जबकि आमीन और मनीष की तबीयत भी लगातार बिगड़ रही है। यह स्थिति यह दर्शाती है कि भूख हड़ताल केवल एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और जीवन के लिए भी एक गंभीर खतरा बन गया है।

कॉकरोच जनता पार्टी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया है। वांगचुक ने एक वीडियो संदेश में कहा कि 20 जुलाई को हर हाल में संसद मार्च होगा और उन्होंने यह भी कहा कि यदि लोग नहीं आए तो वे भूत बनकर वापस आएंगे। यह बयान वांगचुक की दृढ़ता और उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने नीट पेपर लीक के विरोध में 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया है। यह प्रदर्शन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर है। वांगचुक भी इस आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हैं। CJP की स्थापना उस समय हुई जब इसके प्रमुख जस्टिस सूर्यकांत ने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी, जिससे यह पार्टी युवाओं के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण आवाज बन गई है।

वांगचुक का सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में एक लंबा इतिहास है। इससे पहले, उन्होंने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 170 दिन तक जोधपुर जेल में बिताए थे। उन पर आरोप लगाया गया था कि उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई, जिसमें चार लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए। इस हिंसा के बाद सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया। यह घटनाक्रम वांगचुक के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों की गहराई को दर्शाता है।

वांगचुक का वर्तमान आंदोलन केवल एक भूख हड़ताल नहीं है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली में सुधार, सामाजिक न्याय, और छात्रों के अधिकारों के लिए एक व्यापक संघर्ष का हिस्सा है। उनके समर्थकों का बढ़ता समूह और उनके द्वारा उठाए गए मुद्दे सरकार के लिए एक चुनौती बन सकते हैं। आने वाले दिनों में, यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस आंदोलन का कैसे जवाब देती है और क्या वांगचुक की मांगों पर कोई कार्रवाई होती है।

भारत में शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग एक लंबे समय से चली आ रही है। कई सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र संगठन इस दिशा में आवाज उठाते रहे हैं। वांगचुक का आंदोलन इस व्यापक संदर्भ में महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल शिक्षा के मुद्दों को उठाता है, बल्कि यह उन युवाओं की आवाज भी है जो भविष्य के लिए चिंतित हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए न केवल नीतिगत बदलाव की आवश्यकता है, बल्कि इसके क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता और उत्तरदायित्व होना चाहिए। वांगचुक के आंदोलन ने इस दिशा में एक नई बहस को जन्म दिया है, जो छात्रों और शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वालों के लिए महत्वपूर्ण है।

इस आंदोलन के दौरान, वांगचुक ने न केवल छात्रों के अधिकारों की बात की है, बल्कि उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ भी आवाज उठाई है। उनका यह कदम उन छात्रों के लिए प्रेरणादायक है जो अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं।

वांगचुक की भूख हड़ताल और उसके आसपास की घटनाएँ इस बात का संकेत हैं कि कैसे सामाजिक कार्यकर्ता और युवा अपनी आवाज को उठाने के लिए तैयार हैं। यह एक ऐसा समय है जब युवा पीढ़ी अपने अधिकारों के लिए खड़ी हो रही है और सरकारों से जवाबदेही की मांग कर रही है।

भविष्य में, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार वांगचुक के आंदोलन के प्रति संवेदनशीलता दिखाती है और क्या उनके मुद्दों पर ध्यान देती है। यदि सरकार इस मुद्दे को नजरअंदाज करती है, तो यह युवा पीढ़ी के बीच और अधिक असंतोष पैदा कर सकता है।

इस प्रकार, वांगचुक का आंदोलन केवल एक भूख हड़ताल नहीं है, बल्कि यह एक युवा आंदोलन का प्रतीक है जो शिक्षा, न्याय और अधिकारों के लिए एक व्यापक संघर्ष का हिस्सा है। आने वाले समय में, यह आंदोलन कई अन्य सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को भी उजागर कर सकता है।

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