'एक बार सुनने की क्षमता चली गई, तो वापस नहीं आती': कान की ताक़त को ऐसे बचाएं

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 18, 2026, 04:25 PM IST
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सुनने की क्षमता की सुरक्षा के लिए कुछ आसान सावधानियां अपनाकर आप अपने कानों को दशकों तक सुरक्षित रख सकते हैं।

सुनने की क्षमता सिर्फ़ रॉकेट लॉन्च या डेथ मेटल कॉन्सर्ट जैसी बेहद तेज़ आवाज़ों से ही प्रभावित नहीं होती. रोज़मर्रा की कई गतिविधियां भी कानों को नुक़सान पहुंचा सकती हैं.

अच्छी बात यह है कि कुछ आसान सावधानियां अपनाकर आप आने वाले दशकों तक अपने कानों की सुरक्षा कर सकते हैं.

अगर आप कुछ महीनों तक जिम जाना छोड़ दें, तो मेहनत और नियमित अभ्यास के ज़रिये अपनी मांसपेशियां फिर से मज़बूत बना सकते हैं. लेकिन सुनने की क्षमता के साथ ऐसा नहीं है.

अमेरिका के ओहायो स्थित क्लीवलैंड क्लिनिक में ऑडियोलॉजिस्ट और श्रवण-हानि विशेषज्ञ वैलेरी पावलोविच रफ़ कहती हैं, "एक बार सुनने की क्षमता चली जाए, तो उसे वापस नहीं लाया जा सकता।"

हम लंबे समय से जानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ सुनने की क्षमता कम हो जाती है. लेकिन अब विशेषज्ञों को कम उम्र के लोगों में भी सुनने की समस्या के संकेत मिल रहे हैं. इनमें किशोर और 10 साल से कम उम्र के बच्चे भी शामिल हैं.

अमेरिका के एरिज़ोना स्थित मेयो क्लिनिक के ऑडियोलॉजिस्ट जेमी बोगल कहते हैं, "कम उम्र में हम में से ज़्यादातर लोग अपने कानों की सुरक्षा को लेकर लापरवाह रहते हैं।"

वो कहते हैं, "लेकिन ऐसी घटनाओं का असर समय के साथ जुड़ता जाता है. इसलिए युवावस्था में की गई लापरवाहियां बाद के सालों में सुनने की क्षमता पर असर डाल सकती हैं।"

और सिर्फ़ रॉकेट लॉन्च या डेथ मेटल कॉन्सर्ट जैसी बहुत तेज़ आवाज़ों से ही ख़तरा नहीं होता. रोज़मर्रा की कई सामान्य गतिविधियां भी लंबे समय में आपकी सुनने की क्षमता को नुक़सान पहुंचा सकती हैं.

आगे पढ़िए और जानिए कि आने वाले दशकों तक अपने कानों और सुनने की क्षमता की सुरक्षा के लिए आप क्या कर सकते हैं.

सुनने की क्षमता कैसे काम करती है?

कान के पर्दे (ईयरड्रम) के पीछे और अंदरूनी कान में एक तरल पदार्थ से भरी संरचना होती है, जिसे कॉक्लिया कहा जाता है.

इसकी अंदरूनी सतह पर हज़ारों बेहद छोटी हेयर सेल्स यानी बाल जैसी कोशिकाएं होती हैं. हर कोशिका के ऊपर कई नाज़ुक रेशे होते हैं और नीचे एक न्यूरॉन होता है. यह श्रवण तंत्रिका (ऑडिटरी नर्व) से जुड़ा रहता है.

यह तंत्रिका इलेक्ट्रिक सिग्नल को मस्तिष्क तक पहुंचाती है.

जब ध्वनि दबाव तरंगों के रूप में कान में प्रवेश करती है, तो ये सूक्ष्म रेशे हवा में झूमते पेड़ों की तरह हिलने लगते हैं. इनकी यह हरकत इलेक्ट्रिक संकेतों में बदल जाती है. मस्तिष्क इन्हीं संकेतों को ध्वनि के रूप में समझता है.

लेकिन बहुत तेज़ आवाज़ के लंबे समय तक संपर्क में रहने से इन रेशों को नुक़सान पहुंच सकता है. यह ऐसे होता है, जैसे तेज़ तूफ़ानी हवा पेड़ों की शाखाओं को मोड़ दे या तोड़ दे.

समस्या यह है कि ये रेशे पलकों के बालों की तरह दोबारा नहीं उगते.

ऑडियोलॉजिस्ट वैलेरी पावलोविच रफ़ कहती हैं, "मानव कान में जितनी हेयर सेल्स होती हैं, वे जन्म के समय ही मौजूद होती हैं."

वह कहती हैं, "एक बार ये कोशिकाएं नष्ट हो जाएं, तो उनकी क्षति स्थायी होती है. इसे ठीक नहीं किया जा सकता।"

वैज्ञानिक ऐसी जीन थेरेपी विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जो इन सूक्ष्म रेशों को दोबारा उगाने में मदद कर सके.

इस शोध की प्रेरणा ज़ेब्राफ़िश और मुर्ग़ियों जैसे कुछ जानवरों से मिली है, जिनमें ये कोशिकाएं फिर से विकसित हो सकती हैं.

लेकिन जब तक ऐसी तकनीक उपलब्ध नहीं हो जाती, तब तक सबसे अच्छा उपाय बचाव है.

पावलोविच रफ़ कहती हैं, "अपनी सुनने की क्षमता की रक्षा कीजिए क्योंकि जो आपके पास है, वही सबसे कीमती है।"

ज़ोरदार संगीत सुनने का असर मिनटों में

ऑडियोलॉजिस्ट वैलेरी पावलोविच रफ़ कहती हैं, "लाइव संगीत में आम तौर पर आवाज़ को बढ़ाया जाता है और ये अक्सर बहुत तेज़ होती है."

उनके अनुसार, कई कॉन्सर्ट और संगीत कार्यक्रमों में आवाज़ इतनी तेज़ होती है कि केवल 10 से 15 मिनट में ही अंदरूनी कान पर उसका हानिकारक असर शुरू हो सकता है.

वह कहती हैं, "अगर आप पूरा कॉन्सर्ट देखना चाहते हैं, तो आपको ईयरप्लग पहनने चाहिए. लेकिन सामान्य फ़ोम वाले ईयरप्लग संगीत की आवाज़ को विकृत कर सकते हैं."

इसके बजाय, ऐसे हाई-फ़िडेलिटी ईयरप्लग इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है जो आवाज़ को कम तो करते हैं, लेकिन उसकी गुणवत्ता और स्वरूप को नहीं बदलते.

बता दें कि 'फ़िडेलिटी' का मतलब रिकॉर्ड की गई या प्रसारित की गई आवाज़ की वह शुद्धता और सटीकता है जो यह बताती है कि आवाज़ अपने मूल स्रोत के कितनी क़रीब है.

पावलोविच रफ़ कहती हैं, "क़रीब 25 डॉलर (लगभग 19 पाउंड) या उससे कम में भी अच्छे हाई-फ़िडेलिटी ईयरप्लग मिल जाते हैं."

संगीत के शौकीन लोग विशेष रूप से तैयार किए गए कस्टम म्यूज़िशियन ईयरप्लग भी ख़रीद सकते हैं. उनकी क़ीमत लगभग 175 डॉलर (133 पाउंड) होती है और उन्हें ऑडियोलॉजिस्ट की मदद से कान के अनुसार फ़िट किया जाता है.

यही सलाह खेल प्रतियोगिताओं पर भी लागू होती है. कई स्टेडियम अपने दर्शकों के शोर और ऊंचे डेसीबल स्तर पर गर्व करते हैं.

पावलोविच रफ़ कहती हैं, "मैं अक्सर खेल आयोजनों में छोटे बच्चों को कानों की सुरक्षा वाले उपकरण पहने हुए देखती हूं, लेकिन उनके माता-पिता खुद ऐसा नहीं करते."

वह कहती हैं, "अपने कानों का क्या? क्या आप नहीं चाहेंगे कि जब यह बच्चा बड़ा हो जाए, तब भी आप उसकी आवाज़ साफ़-साफ़ सुन सकें?"

हेडफ़ोन से क्या नुक़सान

फिर भी, हममें से ज़्यादातर लोग कभी-कभार ही कॉन्सर्ट या खेल आयोजनों में जाते हैं. आम तौर पर हमारा संगीत और तेज़ आवाज़ों से सबसे ज़्यादा संपर्क हेडफ़ोन या ईयरफ़ोन के ज़रिए ही होता है.

वैलेरी पावलोविच रफ़ कहती हैं, "किशोरों और छोटे बच्चों में भी अब बहुत देर तक तेज़ आवाज़ सुनने की वजह से सुनने की क्षमता में कमी देखने को मिल रही है."

वह हाल ही में अपने क्लिनिक में आए छह साल के एक बच्चे का उदाहरण देती हैं. परिवार को उसकी सुनने की क्षमता में कोई फ़र्क़ महसूस नहीं हुआ था. लेकिन जांच के दौरान उन्हें उसके स्कूल लैपटॉप पर लगातार बहुत ऊंची आवाज़ में सुनने के कारण हुए नुक़सान के संकेत मिले.

स्वीडन में नौ साल के बच्चों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि नियमित रूप से हेडफ़ोन इस्तेमाल करने वाले बच्चों और हेडफ़ोन का इस्तेमाल न करने वाले बच्चों की सुनने की क्षमता में मामूली, लेकिन सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण अंतर था.

शोधकर्ताओं का अनुमान है कि 35 वर्ष से कम उम्र के क़रीब 1.35 अरब लोग तेज़ आवाज़ वाले ऑडियो उपकरणों और व्यक्तिगत सुनने वाले डिवाइसों के कारण समय से पहले सुनने की क्षमता खोने के ख़तरे में हो सकते हैं.

पावलोविच रफ़ कहती हैं कि कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अब आवाज़ को सुरक्षित स्तर तक सीमित रखने वाले फ़ीचर के साथ आते हैं. ऐसे सुरक्षा फ़ीचरों का सम्मान करना ज़रूरी है.

वह कहती हैं, "अगर आप हेडफ़ोन लगाए हुए हैं और आपके क़रीब खड़ा व्यक्ति आपसे सामान्य बातचीत कर सकता है, तो आवाज़ का स्तर ठीक है. लेकिन अगर उसे आपसे बात करने के लिए चिल्लाना पड़े, या आपको उसकी आवाज़ बिल्कुल सुनाई न दे, तो समझिए आवाज़ बहुत ज़्यादा तेज़ है."

मशीनों की आवाज़ें भी ख़तरनाक

घास काटने की मशीन, पत्ते उड़ाने वाली मशीन, लॉनमावर या घर की मरम्मत के काम में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रिक आरी जैसे उपकरण उम्मीद से कहीं ज़्यादा शोर पैदा कर सकते हैं.

अच्छी बात यह है कि अमेरिका के कई इलाक़ों में ज़्यादा शोर करने वाले पेट्रोल से चलने वाले उपकरणों की जगह कम शोर वाले इलेक्ट्रिक उपकरणों को अपनाने के नियम बनाए जा रहे हैं.

वैलेरी पावलोविच रफ़ और जेमी बोगल का कहना है कि ऐसे काम करते समय कानों की सुरक्षा ज़रूर करनी चाहिए. इसके लिए ईयरप्लग, कान को पूरी तरह ढकने वाले ईयरमफ़ या दोनों का एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है.

विशेषज्ञों के अनुसार, जितनी अधिक नॉइज़ रिडक्शन रेटिंग (एनआरआर) वाला सुरक्षा उपकरण आप आराम से पहन सकें, उसे चुनना बेहतर होता है. एनआरआर का हर अतिरिक्त अंक लगभग एक डेसीबल शोर को कम करने में मदद करता है.

जेमी बोगल कहते हैं, "ईयरमफ़ आकार में बड़े होते हैं, ज़्यादा सुरक्षा देते हैं और उनका ग़लत इस्तेमाल होने की संभावना भी कम होती है."

अगर आप इन कामों के दौरान संगीत या पॉडकास्ट सुनना चाहते हैं, तो दोनों विशेषज्ञ नॉइज़-कैंसलिंग ईयरमफ़ पहनने की सलाह देते हैं.

मौसम अच्छा होने पर कार की खिड़की खोलकर सफ़र करना भी लोगों को पसंद आता है. हालांकि, वैलेरी पावलोविच रफ़ चेतावनी देती हैं कि हाईवे पर खिड़की खोलकर यात्रा करने से सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंच सकता है.

उनका कहना है कि तेज़ रफ़्तार में हवा की आवाज़ हमारी सोच से कहीं ज़्यादा तेज़ होती है. ऑडियोलॉजिस्ट अक्सर ऐसे लोगों में एक कान से सुनने की क्षमता कम होने के मामले देखते हैं, जो नियमित रूप से खिड़की खोलकर सफ़र करते हैं.

समस्या तब और बढ़ जाती है जब लोग हवा के शोर के कारण कार का रेडियो या संगीत और तेज़ कर देते हैं. पावलोविच रफ़ कहती हैं, "यह दोहरा नुकसान है."

वह यह भी सलाह देती हैं कि मोटरसाइकिल चलाने वालों को हमेशा ईयरप्लग का इस्तेमाल करना चाहिए.

हालांकि, ऐसे हाई-फ़िडेलिटी ईयरप्लग चुनने चाहिए जो शोर कम करें, लेकिन एम्बुलेंस, पुलिस वाहन और अन्य यातायात से जुड़ी महत्वपूर्ण आवाज़ें सुनाई देती रहें. इससे मोटरसाइकिल के इंजन की तेज़ आवाज़ भी काफ़ी कम महसूस होती है.

ऐसे करें कानों की सुरक्षा

अगर यह लेख पढ़कर आपको लग रहा है कि आपको अपने कानों की सुरक्षा के लिए पहले से ज़्यादा ईयरप्लग इस्तेमाल करने चाहिए, तो आप अकेले नहीं हैं.

लेकिन कानों के अंदर कोई भी चीज़ डालते समय सावधानी बरतना ज़रूरी है.

कान कुछ हद तक स्वत: सफ़ाई करने वाली एक प्रणाली की तरह काम करते हैं. कान का मैल (ईयरवैक्स) कान की नलिका को चिकना बनाए रखता है, मृत त्वचा और बैक्टीरिया को बाहर निकालने में मदद करता है.

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