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जामताड़ा के सदर अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल, गर्भवती को बिना इलाज लौटाने का आरोप

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 17, 2026, 02:35 PM IST
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जामताड़ा सदर अस्पताल में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण ओपीडी सेवाएं ठप रहीं। गर्भवती महिला को इलाज नहीं मिलने से विवाद बढ़ गया।

Jamtara News: झारखंड के जामताड़ा सदर अस्पताल में गुरुवार को एक गर्भवती महिला की मौत के बाद उत्पन्न विवाद शुक्रवार को और गहरा गया। अस्पताल में हुई तोड़फोड़ और चिकित्सकों के साथ अभद्र व्यवहार के विरोध में डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया। झारखंड मेडिकल एसोसिएशन के नेतृत्व में शुरू हुई हड़ताल को चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ का भी समर्थन मिला। इसके चलते सदर अस्पताल की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं, जबकि इमरजेंसी सेवाओं का संचालन जारी रखा गया। हड़ताल के कारण इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रसूता की मौत के बाद अस्पताल में हुआ था हंगामा

जानकारी के अनुसार गुरुवार को शहर के सरकारबांध निवासी एक प्रसूता की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। घटना के बाद परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने की भी बात सामने आई। घटना के बाद अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण हो गया, जिसके विरोध में डॉक्टरों ने अगले दिन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया।

आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े चिकित्सक

कार्य बहिष्कार पर बैठे चिकित्सकों ने अस्पताल में तोड़फोड़ करने वालों की पहचान कर उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। साथ ही अस्पताल परिसर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग उठाई। सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. मिक्की माझी ने कहा कि भय के माहौल में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी अपना दायित्व नहीं निभा सकते। जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए जाते, तब तक सामान्य माहौल बहाल होना मुश्किल है। वहीं डॉ. अशोक चौधरी ने कहा कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ इस तरह की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

हड़ताल से मरीजों की बढ़ी परेशानी

डॉक्टरों के कार्य बहिष्कार का सबसे अधिक असर इलाज के लिए आने वाले मरीजों पर पड़ा। ओपीडी बंद रहने के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों से पहुंचे लोगों को बिना इलाज लौटना पड़ा। कई मरीज निजी अस्पतालों की ओर जाने को मजबूर हुए। अस्पताल परिसर में दिनभर मरीजों और उनके परिजनों की भीड़ लगी रही, लेकिन नियमित चिकित्सा सेवाएं बाधित रहने से लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।

यह घटना झारखंड में चिकित्सा व्यवस्था की एक और भयावह तस्वीर को उजागर करती है। राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पहले से ही नाजुक बनी हुई है, जहाँ संसाधनों की कमी और कर्मचारियों की कमी से मरीजों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता। ऐसे में जब डॉक्टरों का हड़ताल करना पड़ता है, तो यह स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।

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गर्भवती को भर्ती नहीं करने का आरोप

शुक्रवार सुबह नारायणपुर थाना क्षेत्र के मोहनपुर से प्रसव पीड़ा से पीड़ित एक गर्भवती महिला को एंबुलेंस से सदर अस्पताल लाया गया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की हड़ताल का हवाला देते हुए महिला को भर्ती नहीं किया गया और दूसरे अस्पताल जाने की सलाह देकर वापस भेज दिया गया। महिला के पति और साथ आई सहिया ने बताया कि वे सुरक्षित प्रसव की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन इलाज नहीं मिलने से निराश होकर लौटना पड़ा। हालांकि अस्पताल प्रशासन की ओर से इस आरोप पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। फिलहाल डॉक्टरों का कार्य बहिष्कार जारी है और मरीजों की परेशानियां भी लगातार बढ़ रही हैं।

यह स्थिति न केवल जामताड़ा बल्कि झारखंड के अन्य हिस्सों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीरता को दर्शाती है। कई अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को उचित देखभाल नहीं मिल पा रही है। ऐसे में जब डॉक्टर अपनी सुरक्षा की मांग करते हैं, तो यह एक गंभीर समस्या बन जाती है।

राज्य सरकार को इस स्थिति को गंभीरता से लेना चाहिए और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि करना आवश्यक है।

कुल मिलाकर, यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता को उजागर करती है। अगर इस दिशा में कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति हो सकती है, जो मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।

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