मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरेला पर्व के अवसर पर मालाग्राम में पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लिया और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
देहरादून, भारत 14 जुल॰ 2026 ALN: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर विकासखंड स्थित मालाग्राम में हरेला पर्व के उपलक्ष्य में सघन पौधरोपण कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण और हरित उत्तराखंड का संदेश दिया। हरेला पर्व, जो कि उत्तराखंड का एक पारंपरिक त्यौहार है, इस अवसर पर विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह प्रकृति के प्रति सम्मान और पेड़-पौधों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक अनूठा अवसर प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री ने पौधरोपण के दौरान कहा कि यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक स्थायी धरोहर छोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य की जैव विविधता और पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान का संरक्षण आवश्यक है। उत्तराखंड की जैव विविधता, जिसमें कई प्रकार के पौधे, जीव-जंतु और पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं, को संरक्षित करना न केवल स्थानीय पर्यावरण के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर भी महत्वपूर्ण है।
पौधरोपण कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल वृक्षारोपण करना है, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पौधों का बढ़ता हुआ महत्व जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में भी है, और वृक्षारोपण से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को कम करने में मदद मिलती है। इस प्रकार, यह कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए एक कदम है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ भी एक महत्वपूर्ण उपाय है।
कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री ने 'श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड हिमालय' का भी भ्रमण किया। यहां उन्होंने संरक्षित दुर्लभ औषधीय वनस्पतियों और अनुसंधान गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने परिसर में स्थित ध्यान कुटी का निरीक्षण भी किया। यह ध्यान कुटी एक विशेष स्थान है, जहां लोग मानसिक शांति और ध्यान के लिए आते हैं।
ध्यान कुटी का उद्देश्य केवल ध्यान करना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा स्थान है जहां लोग प्राकृतिक वातावरण में अपने मन और आत्मा को शांति प्रदान कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने इस प्रकार के केंद्रों के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि यह स्थान न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह मानसिक स्वास्थ्य को भी बढ़ावा देता है। ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य के बीच के संबंध को समझना आज के समय में अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर जब समाज में तनाव और चिंता की समस्या बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर पूरे विश्व के लिए अमूल्य है। इसका संरक्षण और वैज्ञानिक शोध वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में किए जा रहे प्रयास औषधीय पौधों के संवर्धन, आयुर्वेद आधारित अनुसंधान, हर्बल पर्यटन और स्थानीय युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करेंगे।
आयुर्वेद, जो कि एक प्राचीन चिकित्सा प्रणाली है, उत्तराखंड में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यहां के स्थानीय पौधों और जड़ी-बूटियों का उपयोग करके आयुर्वेदिक उपचार की प्रक्रिया को और अधिक विकसित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार इस दिशा में काम कर रही है ताकि आयुर्वेद को और अधिक प्रोत्साहन दिया जा सके और हर्बल पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सके।
हर्बल पर्यटन, जो कि एक उभरता हुआ क्षेत्र है, स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बना सकता है। इससे न केवल पर्यटकों को प्राकृतिक सौंदर्य और औषधीय पौधों के बारे में जानकारी मिलेगी, बल्कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। हर्बल उत्पादों की बढ़ती मांग ने इस क्षेत्र में निवेश को आकर्षित किया है, जो स्थानीय व्यवसायों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
इस अवसर पर पतंजलि योगपीठ के संस्थापक स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल, यमकेश्वर विधायक रेनू बिष्ट समेत अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहे। इन सभी ने कार्यक्रम के महत्व को स्वीकार किया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा और यह कार्यक्रम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने आसपास के पर्यावरण की रक्षा करें और पौधरोपण के इस अभियान में सक्रिय भागीदारी करें। इस प्रकार के सामूहिक प्रयासों से ही हम अपने पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं।
हालांकि, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई चुनौतियाँ भी हैं। जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण के कारण पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इन समस्याओं का समाधान करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए न केवल वृक्षारोपण की आवश्यकता है, बल्कि ऊर्जा की खपत में कमी लाना, पुनर्नवीनीकरण को बढ़ावा देना और प्रदूषण को नियंत्रित करना भी आवश्यक है।
राज्य सरकार ने इस दिशा में कई योजनाएँ बनाई हैं, जैसे कि वृक्षारोपण अभियान, जल संरक्षण कार्यक्रम और स्वच्छता अभियान। इन योजनाओं के माध्यम से सरकार का उद्देश्य न केवल पर्यावरण की रक्षा करना है, बल्कि लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाना है। इसके अलावा, इन पहलों के माध्यम से समुदायों को भी शामिल किया जा रहा है ताकि वे अपने पर्यावरण की सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभा सकें।
मुख्यमंत्री धामी ने इस कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि हम सभी मिलकर काम करें, तो हम अपने पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया छोड़ सकते हैं।
इस प्रकार, मालाग्राम में आयोजित यह पौधरोपण कार्यक्रम न केवल एक सांकेतिक पहल है, बल्कि यह एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसमें पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय विकास और आयुर्वेद को एक साथ लाने का प्रयास किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल पर्यावरण की रक्षा की जा रही है, बल्कि यह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को भी बढ़ावा देने का एक अवसर है।
इस कार्यक्रम का दीर्घकालिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह स्थानीय समुदायों को पर्यावरण संरक्षण में शामिल करने के साथ-साथ उनके आर्थिक विकास में भी सहायक हो सकता है। पौधरोपण कार्यक्रमों के माध्यम से न केवल वृक्षारोपण किया जा रहा है, बल्कि यह स्थानीय लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और उन्हें सक्रिय बनाने का एक साधन भी है।
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