अरपा नदी के संरक्षण के लिए 4.81 एकड़ भूमि का अधिग्रहण और 18.49 करोड़ का प्रस्ताव

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 16, 2026, 10:52 AM IST
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अरपा नदी के संरक्षण के लिए राज्य सरकार ने 4.81 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने और प्रदूषित पानी के प्रबंधन के लिए 18.49 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है।

अरपा नदी का संरक्षण और पुनरुद्धार एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दा है, जो न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी बल्कि आसपास के समुदायों के जीवन पर भी प्रभाव डालता है। हाल ही में चीफ सेक्रेट्री ने एक जनहित याचिका के जवाब में एक शपथपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें बताया गया कि राज्य सरकार नदी के संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसमें पेंड्रा के अमरपुर स्थित उद्गम स्थल के पास 4.81 एकड़ भूमि का अधिग्रहण शामिल है। यह कदम न केवल नदी के प्रवाह को सुधारने में मदद करेगा, बल्कि इसके आसपास के क्षेत्र के विकास में भी योगदान देगा।

अरपा नदी, जो छत्तीसगढ़ राज्य में बहती है, क्षेत्र के लिए जल, कृषि और परिवहन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसके प्रदूषण और जल स्तर में कमी के कारण स्थानीय समुदायों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए, राज्य सरकार ने 2500 से अधिक कार्यों को मंजूरी दी है, जो नदी के संरक्षण और पुनरुद्धार के लिए आवश्यक हैं। यह कार्य न केवल नदी के प्रवाह को बनाए रखने में मदद करेंगे, बल्कि स्थानीय पारिस्थितिकी को भी पुनर्जीवित करेंगे।

अरपा नदी का जलग्रहण क्षेत्र विभिन्न प्रकार की वनस्पति और जीवों का घर है, जो स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में, नदी के जल स्तर में कमी और उसके प्रदूषण के कारण, इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। स्थानीय किसान, जो नदी के पानी पर निर्भर करते हैं, उन्हें सूखे और फसल की कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, नदी के किनारे बसने वाले समुदायों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में हुई, जिसमें कोर्ट को बताया गया कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली राज्य स्तरीय समिति ने अरपा नदी बेसिन और उद्गम स्थल के वैज्ञानिक विकास की कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया है। यह योजना न केवल नदी के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह स्थानीय समुदायों के लिए भी फायदेमंद होगी। इस योजना में जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने के लिए विभिन्न उपाय शामिल हैं।

गंदे पानी के प्रबंधन के लिए 18.49 करोड़ रुपए का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया है। यह प्रस्ताव गौरेला और पेंड्रा नगर पालिकाओं द्वारा भेजा गया है, जिसमें क्रमशः 11.53 करोड़ और 6.95 करोड़ रुपए का डीपीआर शामिल है। यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो दोनों निकायों में निर्माण कार्य जल्द ही शुरू होगा, जिससे नदी के प्रदूषण को कम करने में सहायता मिलेगी। यह कदम न केवल नदी के जल की गुणवत्ता में सुधार करेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा।

अरपा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में जल स्तर सुधारने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए 2,502 जल संरक्षण कार्यों को मंजूरी दी गई है। इनमें कंटूर ट्रेंच, गैबियन स्ट्रक्चर, गली प्लग और चेक डैम जैसे उपाय शामिल हैं। ये उपाय नदी के जल स्तर को बनाए रखने में मदद करेंगे और साथ ही स्थानीय कृषि और पारिस्थितिकी को भी सुदृढ़ करेंगे। इसके अतिरिक्त, उद्गम से शुरुआती 10 किमी क्षेत्र में 484 विशेष संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है, जो जल संरक्षण के लिए आवश्यक हैं। ये संरचनाएं बारिश के पानी को संचित करने और मिट्टी के कटाव को रोकने में सहायक होंगी।

वन विभाग ने अरपा नदी के कैचमेंट एरिया में 655 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधरोपण पूरा कर लिया है। यह पौधरोपण न केवल स्थानीय पारिस्थितिकी को सुदृढ़ करता है, बल्कि नदी के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पौधरोपण से न केवल वायुमंडल में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है, बल्कि यह मिट्टी की संरचना को भी सुधारता है, जिससे जल संरक्षण में मदद मिलती है। वर्ष 2026-27 में नदी तट के 30 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सघन पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। यह प्रयास हरियाली बढ़ाने और नदी संरक्षण को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।

अरपा नदी के पुनरुद्धार से जुड़ी सभी गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित जिला पंचायत के सीईओ को सौंपी गई है। उन्हें नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो नदी के प्रवाह, पानी की गुणवत्ता और भू-जल स्तर का वैज्ञानिक मापन करेंगे। यह निगरानी सुनिश्चित करेगी कि सभी कार्य सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है। इसके अलावा, नियमित रिपोर्टिंग और डेटा संग्रहण से यह भी सुनिश्चित होगा कि सभी कार्य समय पर और प्रभावी ढंग से किए जा रहे हैं।

राज्य सरकार ने प्रमुख नदियों के पुनरुद्धार के लिए पांच महत्वपूर्ण फैसले किए हैं। इनमें से एक है प्रधानमंत्री गति शक्ति पोर्टल पर चयनित नदियों के उद्गम स्थलों की शत-प्रतिशत डिजिटल मैपिंग। यह प्रक्रिया न केवल डेटा संग्रहण में मदद करेगी, बल्कि भविष्य में योजनाओं के लिए एक ठोस आधार भी प्रदान करेगी। आईआईटी रुड़की, एनआईटी रायपुर और सीएसवीटीयू भिलाई के विशेषज्ञ कार्ययोजना की वैज्ञानिक स्क्रूटिनी कर रहे हैं, जो सुनिश्चित करेगा कि सभी योजनाएँ तकनीकी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मजबूत हों।

इसके अलावा, विभागीय बजट के साथ जिला खनिज न्यास, मनरेगा, कैम्पा, स्वच्छ भारत मिशन और 16वें वित्त आयोग के फंड का कन्वर्जेंस किया जा रहा है। यह वित्तीय सहयोग सुनिश्चित करेगा कि सभी योजनाएँ समय पर और प्रभावी ढंग से लागू की जा सकें। इसके साथ ही, सिल्ट सफाई नीति भी लागू की गई है, जो नदी के प्रदूषण को कम करने में मदद करेगी। यह नीति नदी के किनारे से मिट्टी और कचरे को हटाने के लिए आवश्यक उपायों को निर्धारित करती है, जिससे नदी के प्रवाह को बनाए रखने में सहायता मिलती है।

जुलाई 2026 के अंतिम सप्ताह में राज्य स्तरीय स्रोत महोत्सव और कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें देशभर के पर्यावरणविद, तकनीकी विशेषज्ञ, स्थानीय जनप्रतिनिधि और एनजीओ शामिल होंगे। यह महोत्सव न केवल नदी संरक्षण के लिए जागरूकता बढ़ाने का एक मंच होगा, बल्कि इसमें शामिल सभी पक्षों के सुझावों को भविष्य के रिवर रिवाइवल प्लान में शामिल किया जाएगा। इस प्रकार, यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी हितधारकों की आवाज सुनी जाए और उनके विचारों को योजनाओं में समाहित किया जाए।

इस प्रकार, अरपा नदी के संरक्षण के लिए उठाए गए कदम न केवल नदी के स्वास्थ्य को बहाल करने में मदद करेंगे, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए भी एक सकारात्मक परिवर्तन लाएंगे। ये प्रयास एक समग्र दृष्टिकोण के तहत किए जा रहे हैं, जिसमें विभिन्न विभागों और हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न केवल पर्यावरणीय लाभ होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। नदी के पुनरुद्धार के साथ-साथ, स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी।

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