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सीएम योगी ने 35 करोड़ पौधरोपण महायज्ञ का किया शुभारंभ, चेताया-धरती मां की सेहत का रखें ख्याल

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 12, 2026, 11:33 AM IST
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सीएम योगी ने कहा कि धरती मां के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने का यह महायज्ञ है। धरती माता हम सबको एक अच्छा वातावरण देती है। आगे बढ़ने के लिए अवसर देती है। पेट भरने के लिए हमें अन्न देती है। हमें अच्छे-अच्छे फल देती है। पीने के लिए जल उपलब्ध कराती है। सारी आवश्यकताओं की पूर्ति करती है।

सीएम योगी ने 35 करोड़ पौधरोपण महायज्ञ का शुभारंभ किया

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार की सुबह गोरखपुर से 35 करोड़ पौधरोपण महायज्ञ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर आयोजित जनसभा में उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए धरती मां के स्वास्थ्य की चिंता करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आमतौर पर हम अपनी सेहत का ध्यान रखते हैं, लेकिन जिस धरती पर हम रहते हैं, उसके स्वास्थ्य की चिंता नहीं करते। यह बात उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के संदर्भ में कही, जिसके कारण पर्यावरण के लिए गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। उन्होंने चेताया कि आज मानवता इन समस्याओं की बड़ी कीमत चुका रही है।

सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि आज सभी प्रदेशवासी ‘एक पेड़ मां के नाम’ के महाभियान में भाग ले रहे हैं। यह महायज्ञ धरती मां के प्रति हमारी कृतज्ञता को प्रकट करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि धरती माता हमें एक अच्छा वातावरण, अन्न, फल और जल प्रदान करती है, और इस प्रकार हमारी सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करती है। भारतीय ऋषियों का यह मानना रहा है कि धरती हमारी माता है और हम सभी इसके पुत्र हैं।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि मां हर व्यक्ति और जीव-जन्तु के लिए सबसे सुंदर उपहार होती है, और यह उपहार धरती माता के रूप में भी है। उन्होंने बताया कि पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधरोपण किया गया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में अवसंरचना का तेजी से विकास हुआ है। उन्होंने कहा कि भौतिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी उत्तर प्रदेश ने वनाच्छादन बढ़ाने में सफलता प्राप्त की है।

सीएम योगी ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया आज ग्लोबल वार्मिंग की समस्याओं का सामना कर रही है। मौसम चक्र में बदलाव, पर्यावरण असंतुलन, गर्मी और सर्दी के चरम स्तर पर पहुंचना, ये सभी समस्याएं गंभीर हैं। उन्होंने चेताया कि आने वाले समय में समुद्र के किनारे कई शहर डूबने की स्थिति में होंगे और जल का भीषण संकट उत्पन्न होगा। कई शहर सर्दियों में गैस चैंबर की तरह हो जाते हैं, जिसके कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। यह सब प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन का परिणाम है।

सीएम योगी ने बताया कि उनकी सरकार ने 2017 में जब सत्ता संभाली, तो उन्होंने हैलोजन स्ट्रीट लाइट्स को हटाकर एलईडी स्ट्रीट लाइट्स लगाई, जिससे कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आई। इसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश सरकार को आर्थिक लाभ भी हुआ है। उन्होंने यह भी कहा कि आज सौर पैनल घरों के बिजली के बिल को कम करने में मदद कर रहे हैं और साथ ही ग्रीन एनर्जी का विकल्प भी प्रदान कर रहे हैं।

सीएम योगी ने कांग्रेस के राज का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय गैस सिलेंडर की कीमतें आसमान छू रही थीं। वर्तमान में, उनकी सरकार ने 10 करोड़ परिवारों को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए हैं, जिससे लोगों को राहत मिली है।

लिंक एक्सप्रेसवे के पास पौधरोपण

गोरखपुर में आयोजित इस महायज्ञ के दौरान, सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिंक एक्सप्रेसवे के पास पौधरोपण किया। उन्होंने भगवानपुर टोल प्लाजा के समीप पौधरोपण किया और पवित्र त्रिवेणी (नीम, पीपल और बरगद) के पौधे रोपे। इसके साथ ही, गुब्बारे उड़ाकर पौधरोपण अभियान का शुभारंभ किया।

इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्यमंत्री संजय निषाद, वन एवं पर्यावरण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना, सांसद रवि किशन शुक्ला और अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। सीएम योगी ने आयोजन स्थल पर लगे स्टॉल का अवलोकन किया और उपस्थित लोगों को उत्साहित किया। इसके बाद, उन्होंने उत्तर प्रदेश में नौ वर्ष की हरित गाथा फिल्म और वानिकी कैलेंडर का विमोचन किया।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना की महिला लाभार्थियों को सहजन का पौधा उपहार स्वरूप दिया गया। इसके अलावा, कार्बन क्रेडिट के तहत चार किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह किसानों को प्रोत्साहित करने का भी कार्य करती है।

इस प्रकार, सीएम योगी का यह पौधरोपण महायज्ञ न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाने का एक प्रयास है, बल्कि यह समाज में हरित विकास को बढ़ावा देने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है। यह अभियान उत्तर प्रदेश में हरित क्रांति की दिशा में एक नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सभी नागरिकों को शामिल किया जा रहा है।

इस प्रकार, यह महायज्ञ न केवल उत्तर प्रदेश के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन सकता है। यदि सभी राज्य इस प्रकार के अभियान को अपनाएं, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। यह न केवल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह आर्थिक विकास के लिए भी एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।

धरती मां की सेहत का ख्याल रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। पौधरोपण जैसे अभियानों के माध्यम से हम न केवल अपने पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि अपने भविष्य को भी सुरक्षित कर सकते हैं। इस दिशा में उठाए गए कदम न केवल आज के लिए, बल्कि आने वाले कल के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

पौधरोपण का यह महायज्ञ केवल एक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है जो पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए आवश्यक है। पिछले कुछ दशकों में, जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है। इससे न केवल प्राकृतिक आपदाओं की संख्या में वृद्धि हुई है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, कृषि और जल संसाधनों पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है।

इस संदर्भ में, पौधरोपण जैसे प्रयासों को और अधिक महत्व दिया जाना चाहिए। वृक्षारोपण न केवल वायु गुणवत्ता में सुधार करता है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को भी कम करता है। वृक्षों की उपस्थिति से कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण होता है और ऑक्सीजन का उत्सर्जन होता है, जो जीवन के लिए आवश्यक है। इसके अलावा, वृक्षों की जड़ें मिट्टी के कटाव को रोकती हैं और जल संरक्षण में भी सहायता करती हैं।

सीएम योगी का यह महायज्ञ इस बात का प्रतीक है कि जब लोग एकजुट होकर पर्यावरण के संरक्षण के लिए काम करते हैं, तो बड़े पैमाने पर सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं। यह न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के लिए एक उदाहरण बन सकता है। अगर हर राज्य और हर समुदाय इस तरह के अभियानों को अपनाए, तो हम एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं।

इस महायज्ञ के माध्यम से, सरकार ने यह संदेश भी दिया है कि पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सभी को मिलकर इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है ताकि हम अपनी धरती मां का ख्याल रख सकें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण बना सकें।

अंत में, यह महायज्ञ न केवल एक पौधरोपण कार्यक्रम है, बल्कि यह एक सामाजिक आंदोलन का हिस्सा है जो सभी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने और उसके संरक्षण के लिए प्रेरित करने का कार्य कर रहा है। यह एक ऐसा कदम है जो न केवल आज के लिए, बल्कि आने वाले कल के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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