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चीतों को बचाने की बड़ी मुहिम: खतरनाक इंफेक्शन और पिस्सू से सुरक्षा के लिए लगाई जा रही 'ब्रेवेक्टो' दवा

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 12, 2026, 11:53 AM IST
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बारिश के मौसम में टिक और बाहरी परजीवियों का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए खुले जंगल में विचरण कर रहे चीतों को प्राथमिकता के आधार पर यह दवा दी जा रही है।

नईदुनिया प्रतिनिधि, श्योपुर। बारिश के सीजन में चीतों को पिस्सू और बाहरी परजीवियों से संक्रमण आदि का खतरा न रहे, इसके लिए वन विभाग इन दिनों कूनो के चीतों को ब्रेवेक्टो नाम की दवा लगाने का काम कर रहा है। कूनो नेशनल पार्क के सीसीएफ उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि इसके लिए उन चीतों का चयन किया गया है, जिन्हें यह दवा लगाना आवश्यक है। चयन के बाद उन चीतों को एक-एक से बेहोश करके डॉक्टर और विशेषज्ञों की देखरेख में इस दवा का लेप लगाया जा रहा है।

वन्यजीव संरक्षण के संदर्भ में चीतों का संरक्षण एक महत्वपूर्ण विषय बन गया है। चीतों की संख्या में कमी और उनके प्राकृतिक आवास में कमी के कारण कई तरह की चुनौतियाँ उत्पन्न हुई हैं। भारत में चीतों की स्थिति को देखते हुए, इन्हें पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया पिछले कुछ वर्षों में तेजी से आगे बढ़ी है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों का पुनर्वास इस दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यहाँ पर चीतों को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न उपाय किए जा रहे हैं, जिसमें ब्रेवेक्टो दवा का उपयोग भी शामिल है।

बेहद खतरनाक संक्रमण

कूनो के कुछ चीतों के शरीर पर खास तौर पर गले में कॉलर आईडी वाले हिस्से में संक्रमण फैल गया था, संक्रमण बेहद खतरनाक हुआ, इससे कुछ चीतों की मौत भी हुई थी। चीता एक्सपर्ट और डॉक्टरों की सलाह के बाद हालातों से निपटने के लिए चीतों को संक्रमण के खतरे से बचाने के लिए ब्रेवेक्टो नाम की दवा का घोल उनके शरीर पर लगाने का काम किया जा रहा है। यह दवा पिस्सू, टिक और बाहरी परजीवियों से कुत्ते-बिल्ली सहित अन्य जानवरों को बचाने के लिए कारगर मानी जाती है। जिसका लेप चीतों को लगाया जा रहा है।

बीते दिनों ग्वालियर के पनिहार से ट्रैंकुलाइज की गई चीता सीसीबी-3 को यह दवा लगाई जा चुकी है। अब उन अन्य चीतों को भी यह दवा लगाई जा रही है जिन्हें इसकी आवश्यकता है। खुले जंगल में घूम रहे ज्यादातर चीतों को लगाई जाएगी दवा -कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन की टीमें पिस्सू और इन्फेक्शन के खतरे को रोकने के लिए वैसे जरुरतमंद प्रत्येक चीते को दवा लगा रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा खुले जंगल में विचरण कर रहे चीतों को यह दवा लगाई जा रही है क्योंकि, खुले जंगल में घूमने वाले चीतों को इन्फेक्शन का ज्यादा खतरा है।

ब्रेवेक्टो दवा की प्रभावशीलता के संदर्भ में, यह एक मौखिक दवा है, जो आमतौर पर कुत्तों और बिल्लियों में पिस्सू और टिक के खिलाफ उपयोग की जाती है। यह दवा चीतों के लिए भी सुरक्षित मानी गई है, और इसके प्रयोग से चीतों को बाहरी परजीवियों से सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, यह दवा चीतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी सहायक होगी।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य न केवल चीतों का संरक्षण करना है, बल्कि उनके प्राकृतिक आवास को भी सुरक्षित रखना है। चीतों के लिए उपयुक्त वातावरण तैयार करने के लिए वन विभाग के विशेषज्ञ लगातार प्रयास कर रहे हैं। यह दवा लगाने के साथ-साथ, चीतों के भोजन, पानी और अन्य आवश्यकताओं का भी ध्यान रखा जा रहा है।

चीतों के लिए इस प्रकार के स्वास्थ्य संबंधी उपायों का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि इनका जीवन चक्र और प्रजनन क्षमता बाहरी तत्वों से प्रभावित होती है। यदि चीतों को संक्रमण या परजीवियों से बचाने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए जाते हैं, तो यह उनकी संख्या में कमी का कारण बन सकता है। इसके परिणामस्वरूप, चीतों की प्रजाति को गंभीर खतरा हो सकता है।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे इस अभियान का एक बड़ा उद्देश्य यह भी है कि चीतों को उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित किया जा सके। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि चीतों का पर्यावरण उनके लिए अनुकूल हो, ताकि वे अपनी प्राकृतिक आदतों के अनुसार जीवन यापन कर सकें। इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों में चीतों के लिए भोजन की उपलब्धता, पानी के स्रोत और अन्य आवश्यकताओं का ध्यान रखा जा रहा है।

इस अभियान के पीछे एक बड़ा उद्देश्य यह भी है कि चीतों की संख्या को बढ़ाना और उन्हें एक स्थायी प्रजाति के रूप में स्थापित करना है। इसके लिए वन विभाग और अन्य संबंधित संस्थाएँ मिलकर काम कर रही हैं। चीतों के संरक्षण के लिए जागरूकता फैलाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय समुदाय और पर्यटकों को चीतों के महत्व के बारे में बताया जा सके।

कूनो नेशनल पार्क में चीतों का संरक्षण एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, लेकिन इसके लिए वन विभाग और विशेषज्ञों द्वारा किए जा रहे प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय हैं। ब्रेवेक्टो दवा का उपयोग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो चीतों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सुनिश्चित करने में मदद करेगा। इसके परिणामस्वरूप, चीतों की संख्या में वृद्धि और उनके संरक्षण में मदद मिलेगी, जो कि भारत की जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

चीतों की स्थिति को देखते हुए, यह ध्यान देने योग्य है कि चीतों का संरक्षण केवल वन्यजीवों की रक्षा के लिए नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए भी आवश्यक है। चीतों जैसे शीर्ष शिकारी प्रजातियाँ पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे अपने शिकार की जनसंख्या को नियंत्रित करके अन्य प्रजातियों के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती हैं। यदि चीतों की संख्या में कमी आती है, तो यह शिकार की जनसंख्या में वृद्धि का कारण बन सकता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र में असंतुलन पैदा हो सकता है।

इसलिए, चीतों का संरक्षण न केवल उनके लिए बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों के लिए चलाए जा रहे इस अभियान का महत्व केवल एक प्रजाति के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जैव विविधता को बनाए रखने और पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है।

इस अभियान की सफलता के लिए यह भी आवश्यक है कि स्थानीय समुदायों को इसमें शामिल किया जाए। स्थानीय लोग चीतों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्हें चीतों के महत्व और उनके संरक्षण के लाभ के बारे में जागरूक करना आवश्यक है। इसके लिए वन विभाग द्वारा विभिन्न कार्यक्रम और कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं, ताकि स्थानीय समुदायों को चीतों के संरक्षण में शामिल किया जा सके।

अंततः, चीतों के संरक्षण के इस अभियान का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह भारत की वैश्विक स्तर पर जैव विविधता संरक्षण की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। चीतों का पुनर्स्थापन और उनका संरक्षण न केवल राष्ट्रीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी महत्वपूर्ण है। यह अन्य देशों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे एक प्रजाति के संरक्षण के लिए प्रभावी उपाय किए जा सकते हैं।

इस प्रकार, कूनो नेशनल पार्क में चीतों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे प्रयास एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाते हैं, जिसमें स्वास्थ्य, पारिस्थितिकी और समुदाय के सहयोग को शामिल किया गया है। ब्रेवेक्टो दवा का उपयोग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो चीतों को बाहरी परजीवियों से सुरक्षित रखने में मदद करेगा और उनके स्वास्थ्य में सुधार करेगा। इस प्रकार के प्रयासों से चीतों की संख्या में वृद्धि और उनके संरक्षण में मदद मिलेगी, जो कि भारत की जैव विविधता के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।

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