इस बार नहीं बच पाए बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव, चेक बाउंस मामले में हो गई तीन महीने की जेल

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 11, 2026, 07:18 AM IST
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दिल्ली हाई कोर्ट ने राजपाल यादव को चेक बाउंस मामले में तीन महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह मामला 2010 में लिए गए कर्ज़ से जुड़ा है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को तीन महीने की जेल की सज़ा सुनाई है।

राजपाल यादव के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराने वाली कंपनी के वकील के अनुसार, "दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने चेक बाउंस मामले में राजपाल यादव को दोषी ठहराने के निचली अदालत के फ़ैसले को बरकरार रखा है और उन्हें शिकायतकर्ता को राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।" यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली में आर्थिक अपराधों की गंभीरता को दर्शाता है, विशेषकर जब यह किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से संबंधित हो।

राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव भी इस मामले में सह-अभियुक्त हैं और अदालत ने उन्हें भी पैसे चुकाने का आदेश दिया है। यह एक महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि यह दिखाता है कि आर्थिक दायित्व केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक सदस्यों पर भी प्रभाव डालता है।

साल 2010 में राजपाल यादव ने अपनी एक फ़िल्म 'अता, पता, लपाता' के लिए 'मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक निजी कंपनी से क़रीब पांच करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया था। फ़िल्म का विषय और उसकी प्रस्तुति पर चर्चा करते हुए यह कहा जा सकता है कि भारतीय सिनेमा में कई बार ऐसे प्रोजेक्ट्स होते हैं जो अपेक्षित सफलता नहीं प्राप्त कर पाते हैं। हालांकि, फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने में असफल रही और यह निवेश कथित तौर पर डूब गया, जिसके कारण वह कंपनी को कर्ज़ वापस नहीं कर पाए।

पिछली अदालती कार्यवाही के अनुसार, राजपाल यादव ने बार-बार पैसे लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन ऐसा करने में नाकाम रहे। यह एक आम स्थिति है जहां उधार लेने वाले व्यक्ति अपने वादों को पूरा नहीं कर पाते हैं, जिससे कानूनी विवाद उत्पन्न होते हैं। इस दौरान, अदालतों ने भी उनके ख़िलाफ़ आदेश जारी किए, लेकिन उन्होंने समय पर इन आदेशों का पालन नहीं किया।

बाद में, राजपाल यादव ने कंपनी को सात चेक दिए जो बाउंस हो गए। चेक बाउंस होना एक गंभीर वित्तीय अपराध माना जाता है, और इसके लिए भारतीय कानूनी प्रणाली में सख्त प्रावधान हैं। इसके बाद उनके ख़िलाफ़ एक औपचारिक मामला दर्ज किया गया।

साल 2018 में पहली बार दिल्ली की एक अदालत ने राजपाल यादव को इस मामले में दोषी पाया और छह महीने जेल की सज़ा सुनाई। यह निर्णय उस समय आया जब राजपाल यादव को पहले से ही कई बार अदालत के आदेशों का पालन करने के लिए कहा गया था। साल 2018 में यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने उनकी सज़ा पर रोक लगा दी। यह दिखाता है कि उच्च न्यायालयों में मामलों की सुनवाई में अक्सर समय लगता है, और कई बार न्यायिक प्रक्रिया में देरी होती है।

पिछले कुछ वर्षों में, अदालतों ने राजपाल यादव की सज़ा के ख़िलाफ़ कई बार रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं, जिसमें उन्हें पैसे चुकाने के लिए कहा गया। लेकिन वे पैसों का भुगतान करने में असमर्थ रहे। यह स्थिति उनकी वित्तीय स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है, जो एक अभिनेता के लिए असामान्य नहीं है, विशेषकर जब वे बड़े बजट की फ़िल्मों में निवेश करते हैं।

उसके बाद अदालत ने उन्हें इस साल फरवरी में जेल अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया। राजपाल फ़रवरी 2026 में कुछ दिनों तक जेल में रहे और फिर 1.5 करोड़ रुपये की किस्त जमा करने के बाद उन्हें अंतरिम ज़मानत मिल गई। हालांकि, इसके बाद वे अदालत में दिए गए आश्वासन को पूरा नहीं कर सके। यह एक महत्वपूर्ण बिंदु है, क्योंकि यह दिखाता है कि कैसे कई बार ज़मानत मिलने के बाद भी व्यक्ति अपनी जिम्मेदारियों को नहीं निभा पाता है।

अदालत ने क्या कहा

लाइव लॉ के मुताबिक़ जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने राजपाल यादव को सभी सातों मामलों में तीन-तीन महीने के साधारण क़ैद की सज़ा सुनाई है। अदालत ने निर्देश दिया है कि सभी सज़ाएं साथ-साथ चलेंगीं। यह एक महत्वपूर्ण कानूनी निर्णय है जो यह स्पष्ट करता है कि एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार सज़ा दी जा सकती है।

शुक्रवार को अदालत ने हर मामले में शिकायतकर्ता को 1.05 करोड़ रुपये के भुगतान करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा शिकायतकर्ता को 1 करोड़ चार लाख 75 हज़ार रुपये और राज्य को 25 हज़ार रुपये देने का भी आदेश दिया है। यह आदेश दर्शाता है कि अदालत ने केवल सज़ा नहीं दी, बल्कि वित्तीय मुआवजे का भी ध्यान रखा है।

अदालत ने राजपाल यादव की पत्नी राधा यादव को भी हर मामले में शिकायतकर्ता को पांच करोड़ 51 हज़ार 380 रुपये भुगतान करने का निर्देश भी दिया है। यह दिखाता है कि अदालत ने मामले में पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखा है।

अदालत ने कहा कि सेशन कोर्ट ने समझौते के तहत राजपाल यादव को पहले ही शिकायतकर्ता को किए गए भुगतान को ध्यान में रखा था और ज़ुर्माना तय करने में ट्रायल कोर्ट की ओर से कोई भी ग़लती नहीं हुई। जस्टिस शर्मा ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता को पहले ही 2.25 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है, ये राशि अंतिम ज़ुर्माना और मुआवज़ा तय करने में समायोजित की जाएगी।

वकीलों का क्या कहना है

कोर्ट ने राजपाल यादव को इस सज़ा के फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने के लिए दो महीने का समय दिया है। यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, क्योंकि न्यायिक प्रणाली में अपील का अधिकार हर व्यक्ति को दिया गया है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि अभिनेता राजपाल यादव की ओर से कंपनी को पहले ही भुगतान की जा चुकी 2.25 करोड़ रुपये की राशि कुल राशि में से काट ली जाएगी।

शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट्स कंपनी के वकील अविनाश सिक्का ने फ़ैसले के बाद पत्रकारों को बताया कि अदालत ने मामले की सुनवाई के आखिरी दिन राजपाल यादव के बयान को अपने अंतिम फ़ैसले में दर्ज किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह पांच बार जेल जाने के लिए तैयार हैं लेकिन एक पैसा भी नहीं देंगे। यह बयान दर्शाता है कि राजपाल यादव की मानसिकता और उनके प्रति कानूनी प्रक्रिया की गंभीरता को समझने में मदद करता है।

राजपाल यादव के वकील भास्कर उपाध्याय ने कहा है कि राजपाल यादव ने अदालत में बताया था कि एक अपराध के लिए उन्हें कितनी बार सज़ा दी जाएगी। उन्होंने दावा किया कि "हमने मामला हाई कोर्ट में आने से पहले ही 4.5 करोड़ रुपये वसूल कर लिए थे। लेकिन इतने सारे मामले हैं कि कुछ में बकाया राशि 11.5 करोड़ रुपये बताई गई है। दीवानी फैसले में इसे 10.5 करोड़ रुपये बताया गया है।"

उन्होंने आगे कहा, "हाई कोर्ट ने कहा है कि इस अदालत में अब तक एकत्र की गई राशि ही जोड़ी जाएगी। हमने इस अदालत में 2.25 करोड़ रुपये एकत्र किए हैं, केवल उसी पर विचार किया जाएगा। यानी, हाई कोर्ट में आने से पहले हमने जो 4.5 करोड़ रुपये जमा किए थे, वह शून्य हो गए हैं।"

भास्कर उपाध्याय ने आगे कहा, "हमने अभी तक विस्तृत फ़ैसले को नहीं देखा है। हमें इन सभी पहलुओं की जांच करनी होगी। हमारे पास अपील करने के लिए अब दो महीने का समय है। हम इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करेंगे।" यह स्थिति दर्शाती है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान विवादों और कानूनी मुद्दों का समाधान कैसे किया जाता है।

राजपाल यादव का यह मामला केवल एक व्यक्तिगत कानूनी लड़ाई नहीं है, बल्कि यह भारतीय फिल्म उद्योग में वित्तीय अनुशासन और कानूनी जिम्मेदारियों के महत्व को भी उजागर करता है। इस मामले के परिणामस्वरूप अन्य कलाकारों और निर्माताओं को यह सीखने को मिलेगा कि वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता और जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है।

इस मामले के आगे बढ़ने से यह भी स्पष्ट होगा कि क्या राजपाल यादव और उनकी पत्नी अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में सक्षम होंगे या नहीं। इसके अलावा, यह भी देखना होगा कि क्या यह मामला भारतीय न्याय प्रणाली में किसी प्रकार की सुधार की आवश्यकता को उजागर करता है, विशेषकर आर्थिक अपराधों के क्षेत्र में।

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