अररिया के युवा साजन की फिल्म 'भगवान का दोस्त' का अंतरराष्ट्रीय चयन

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 17, 2026, 11:59 AM IST
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बिहार के साजन कुमार ठाकुर की लघु फिल्म 'भगवान का दोस्त' का चयन 17वें अहमदाबाद इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए हुआ है।

भगवान का दोस्त: बिहार में फिल्म निर्माण की काफी संभावनाएं हैं। अररिया के फारबिसगंज के युवा फिल्मकार साजन कुमार ठाकुर ने अपनी प्रतिभा के दम पर बिहार का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। उनकी 20 मिनट की लघु फिल्म ‘भगवान का दोस्त’ का चयन प्रतिष्ठित 17 वें अहमदाबाद इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए किया गया है। यह फिल्म महोत्सव आगामी 30 सितंबर से 2 अक्टूबर तक अहमदाबाद में आयोजित होगा, जहां देश-विदेश की चयनित फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। भगवान का दोस्त का चयन होना फारबिसगंज के लिए गौरव की बात मानी जा रही है।

फिल्म के चयन की खबर मिलते ही साजन कुमार ठाकुर, उनके परिवार और शुभचिंतकों में खुशी की लहर दौड़ गई। फारबिसगंज के पुराना बस स्टैंड स्थित होंडा शोरूम के पीछे वार्ड संख्या-8 निवासी दयानंद ठाकुर एवं सुलेखा देवी के पुत्र साजन कुमार ठाकुर ने अपनी स्कूली शिक्षा सरस्वती विद्या मंदिर, फारबिसगंज से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय के साइंस कॉलेज से स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ फिल्म निर्माण के प्रति उनका जुनून लगातार बढ़ता रहा और इसी जुनून ने उन्हें लघु फिल्म निर्माण की ओर प्रेरित किया।

मुख्य भूमिका में साजन

वर्ष 2025 में साजन ने ‘भगवान का दोस्त’ का निर्माण किया। इस फिल्म की कहानी, पटकथा, निर्देशन और मुख्य भूमिका स्वयं साजन ने निभाई है। साजन के अनुसार ‘भगवान का दोस्त’ भावनात्मक व प्रेरणादायक फिल्म है, फिल्म में मुख्य भूमिका स्वयं साजन कुमार ठाकुर ने निभाई है। वहीं अनुराग कुमार, दीपक सिंह, आकाश जोशी, ऋषभ कुमार और सौरव केसरी ने सह कलाकार के रूप में अभिनय किया है। फिल्म के डीओपी एवं एडिटिंग की जिम्मेदारी चंदन प्रकाश पांडे ने निभाई है। फिल्म का गीत प्रतीक सूरी, बांसुरी वादन मनीष ऋजु तथा मिक्सिंग का कार्य रविरंजन ने किया है। इस घोषणा के बाद से अररिया में खुशी की लहर दौड़ गई है।

यह फिल्म न केवल साजन के लिए, बल्कि पूरे बिहार के फिल्म उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। बिहार में फिल्म निर्माण की संभावनाएं बढ़ रही हैं, और युवा फिल्मकारों के लिए यह एक प्रेरणा का स्रोत बन सकता है। साजन की कहानी यह दर्शाती है कि कैसे एक छोटे शहर से आने वाला एक युवा अपनी मेहनत और लगन से बड़े मंच पर अपनी पहचान बना सकता है।

अररिया जैसे छोटे शहर में, जहां अक्सर युवा प्रतिभाओं को अपनी कला दिखाने का अवसर नहीं मिलता, साजन का यह कदम एक नई दिशा दिखाता है। फिल्म निर्माण के क्षेत्र में बिहार की प्रतिभाओं को पहचान दिलाने का कार्य धीरे-धीरे शुरू हो चुका है। इससे पहले भी कई युवा फिल्मकारों ने अपने काम से ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन साजन का यह विशेष चयन एक नई उम्मीद जगाता है।

उपलब्धि का श्रेय माता-पिता को दिया

साजन ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, बहन साक्षी ठाकुर, गुरु प्रो. सुमित रंजन और अधिवक्ता धनंजय कुमार को दिया। उन्होंने कहा कि उनके परिवार का समर्थन और मार्गदर्शन हमेशा उनके साथ रहा है, जिसने उन्हें अपने सपनों को पूरा करने में मदद की। यह बात भी महत्वपूर्ण है कि साजन ने अपने परिवार के सदस्यों का नाम लिया, जो यह दर्शाता है कि उन्होंने अपने सफर में परिवार के महत्व को समझा है।

साजन ने बताया कि फिल्म महोत्सव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ‘भगवान का दोस्त’ को उनके आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर भी रिलीज किया जाएगा, ताकि आम दर्शक भी इस कहानी का आनंद ले सकें। यह एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि डिजिटल प्लेटफार्मों पर फिल्में रिलीज करने से युवा फिल्मकारों को अपने काम को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिलता है।

फिल्म की कहानी और उसके संदेश पर चर्चा करते हुए साजन ने कहा कि ‘भगवान का दोस्त’ एक ऐसी फिल्म है जो न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि दर्शकों को सोचने पर भी मजबूर करती है। यह फिल्म मानवीय संबंधों, दोस्ती और संघर्ष की कहानी है, जो आज के युवा वर्ग के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। साजन ने यह भी कहा कि वे अपने काम के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके अलावा, साजन का यह प्रयास उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो फिल्म उद्योग में कदम रखना चाहते हैं। यह दिखाता है कि यदि आपके पास जुनून और समर्पण है, तो आप किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं। बिहार के युवा फिल्मकारों को अब यह समझने की आवश्यकता है कि वे भी अपनी कहानियों को बड़े मंच पर पेश कर सकते हैं।

अहमदाबाद इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल जैसे प्लेटफार्मों पर फिल्म का चयन होना, साजन के लिए एक बड़ा अवसर है। यह न केवल उनकी मेहनत का फल है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि फिल्म उद्योग में छोटे शहरों से आने वाले फिल्मकारों की प्रतिभा को मान्यता मिल रही है। ऐसे महोत्सवों में भाग लेना और अपनी फिल्म को प्रदर्शित करना, फिल्मकारों के लिए एक महत्वपूर्ण अनुभव होता है, जो उन्हें अपने काम को और बेहतर बनाने में मदद करता है।

साजन की सफलता की कहानी यह भी दिखाती है कि कैसे स्थानीय प्रतिभाएं वैश्विक स्तर पर पहचान बना सकती हैं। बिहार जैसे राज्य में, जहां फिल्म निर्माण का इतिहास सीमित रहा है, साजन जैसे युवा फिल्मकारों की सफलता से एक नई उम्मीद और उत्साह का संचार होता है। इससे न केवल अन्य युवा फिल्मकारों को प्रेरणा मिलेगी, बल्कि यह भी संभव है कि बिहार में फिल्म उद्योग के विकास की दिशा में और अधिक प्रयास किए जाएं।

इस तरह के आयोजन से यह भी संभावना है कि स्थानीय स्तर पर फिल्म निर्माण को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे न केवल फिल्मकारों को अपने काम को प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित होगा कि स्थानीय कहानियों और संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया जा सके। साजन की फिल्म ‘भगवान का दोस्त’ इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है।

बिहार का फिल्म उद्योग: एक संक्षिप्त इतिहास

बिहार का फिल्म उद्योग, जिसे अक्सर "बिहारी सिनेमा" कहा जाता है, का अपना एक समृद्ध इतिहास है। हालांकि, यह उद्योग मुख्यधारा के भारतीय सिनेमा की तुलना में अपेक्षाकृत कम विकसित रहा है। बिहार में फिल्म निर्माण का इतिहास 1930 के दशक में शुरू हुआ, जब कुछ स्थानीय फिल्म निर्माताओं ने अपने प्रयासों से फिल्में बनाना शुरू किया। लेकिन समय के साथ, स्थानीय फिल्म उद्योग ने कई चुनौतियों का सामना किया, जिसमें वित्तीय संसाधनों की कमी और तकनीकी विकास की कमी शामिल है।

हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में, बिहार में फिल्म निर्माण की संभावनाएं बढ़ी हैं। कई युवा फिल्मकारों ने अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता से इस क्षेत्र में कदम रखा है। साजन कुमार ठाकुर जैसे युवा फिल्मकारों की सफलताएं इस बात का प्रमाण हैं कि बिहार में फिल्म निर्माण की संभावनाएं अब बढ़ रही हैं।

इसके अलावा, बिहार सरकार ने भी फिल्म उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए कई पहल की हैं, जैसे कि फिल्म फेस्टिवल का आयोजन और स्थानीय फिल्म निर्माताओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना। यह सभी प्रयास मिलकर एक सकारात्मक माहौल बना रहे हैं, जिससे बिहार के फिल्म उद्योग को एक नई दिशा मिल रही है।

साजन की फिल्म ‘भगवान का दोस्त’ का अंतरराष्ट्रीय चयन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल साजन के लिए, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि बिहार में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बल्कि उन्हें अवसर और समर्थन की आवश्यकता है।

इस प्रकार, साजन का यह कदम न केवल उनके व्यक्तिगत सपनों की पूर्ति का प्रतीक है, बल्कि यह बिहार के फिल्म उद्योग के लिए एक नई उम्मीद और प्रेरणा का स्रोत भी है। इससे यह भी उम्मीद की जा सकती है कि भविष्य में और भी युवा फिल्मकार आगे आएंगे और बिहार के फिल्म उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।

इस प्रकार, साजन कुमार ठाकुर की कहानी एक प्रेरणादायक यात्रा है, जो यह दर्शाती है कि अगर आपके पास जुनून और समर्पण है, तो आप किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं। यह न केवल साजन के लिए, बल्कि सभी उन युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है जो अपने सपनों को साकार करने की कोशिश कर रहे हैं।

अररिया से अंजनी गौतम की रिपोर्ट

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