सीबीएसई 10वीं सेकंड एग्जाम का रिजल्ट जारी, 96.78% छात्र पास

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 18, 2026, 09:39 PM IST
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा 10वीं की 'सेकंड बोर्ड' परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित किया, जिसमें 96.78% पास प्रतिशत और 60% विद्यार्थियों ने अपने अंकों में सुधार किया।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने हाल ही में कक्षा 10वीं की 'सेकंड बोर्ड' परीक्षा 2026 का परिणाम जारी किया है, जो कि शैक्षणिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इस बार की परीक्षा में कुल पास प्रतिशत 96.78 प्रतिशत दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा न केवल छात्रों के लिए एक प्रोत्साहन है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। परीक्षा में शामिल हुए लगभग 6.68 लाख छात्रों को अब सीबीएसई के आधिकारिक रिजल्ट पोर्टल और डिजीलॉकर के माध्यम से अपना प्रोविजनल स्कोरकार्ड देखने और डाउनलोड करने की सुविधा उपलब्ध है।

सीबीएसई द्वारा आयोजित यह सेकंड बोर्ड परीक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप शुरू की गई थी। NEP 2020 का उद्देश्य शिक्षा प्रणाली में सुधार करना और छात्रों को बेहतर अवसर प्रदान करना है। इस नई प्रणाली के तहत, कक्षा 10वीं के छात्र-छात्राओं को एक ही वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षा में बैठने का अवसर दिया गया है, जिससे वे अपने अंकों में सुधार कर सकें। यह पहल छात्रों के मानसिक तनाव को कम करने में भी सहायक सिद्ध हुई है, क्योंकि अब उन्हें केवल एक बार परीक्षा में उत्तीर्ण होने का दबाव नहीं झेलना पड़ता।

छात्रों के प्रदर्शन में सुधार
सीबीएसई द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस सेकंड बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 6,64,027 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 6,63,777 छात्र परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 5,13,955 छात्रों ने मुख्य परीक्षा के मुकाबले अपने स्कोर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से परीक्षा दी थी। इनमें से 3,08,095 छात्रों ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है, जो कि कुल 59.95 प्रतिशत है। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि छात्रों ने इस नई परीक्षा प्रणाली का सही तरीके से लाभ उठाया है।

बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि नियमित छात्रों का अंतिम परिणाम तैयार करते समय दोनों परीक्षाओं में से उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को ही मान्य माना जाएगा। इससे छात्रों को अपने अंकों को बेहतर बनाने का एक और अवसर मिला है। इसके साथ ही, कंपार्टमेंट श्रेणी के तहत परीक्षा देने वाले 1,49,822 छात्रों में से 78,503 छात्र उत्तीर्ण हुए हैं, जिससे कंपार्टमेंट का पास प्रतिशत सुधरकर 52.40% हो गया है। यह पिछले साल के 48.68% से काफी बेहतर है, जो कि छात्रों की मेहनत और नई परीक्षा प्रणाली की सफलता को दर्शाता है।

डिजिटल दस्तावेज और मार्कशीट वितरण
सीबीएसई ने परिणाम जारी करने के साथ ही डिजिटल और भौतिक मार्कशीट के वितरण को लेकर विस्तृत जानकारी साझा की है। सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के स्कूल-वार परिणाम उनके पंजीकृत ईमेल एड्रेस पर सीधे साझा किए जाएंगे। इसके अलावा, स्कूल अपने मौजूदा लॉगिन क्रेडेंशियल का उपयोग करके सीबीएसई रिपोजिटरी से भी छात्रों के डिजिटल शैक्षणिक दस्तावेज हासिल कर सकते हैं। नियमित छात्रों के लिए प्रिंटेड मार्कशीट और पासिंग सर्टिफिकेट उनके संबंधित स्कूलों के माध्यम से वितरित किए जाएंगे।

प्राइवेट उम्मीदवारों को उनके डिजिटल दस्तावेज डिजीलॉकर के माध्यम से मिलेंगे, जबकि प्रिंटेड कॉपियां उनके पंजीकृत पते पर डाक द्वारा भेजी जाएंगी। इसके अतिरिक्त, दिल्ली ईस्ट और दिल्ली वेस्ट रीजनल ऑफिस के तहत आने वाले छात्रों के लिए अलग से मुद्रित दस्तावेज संबंधित परीक्षा केंद्रों पर उपलब्ध कराए जाएंगे। परिणाम के बाद की अन्य सेवाओं की जानकारी जल्द ही आधिकारिक सर्कुलर से दी जाएगी।

सीबीएसई ने छात्रों और अभिभावकों को सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक वेबसाइट पर ही भरोसा करने की सख्त हिदायत दी है। यह कदम इस बात को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि छात्रों को सही और सटीक जानकारी मिले। बोर्ड का यह प्रयास छात्रों को सही मार्गदर्शन प्रदान करने और उनकी शैक्षणिक यात्रा में सहायता करने के लिए है।

सीबीएसई की यह नई परीक्षा प्रणाली छात्रों को आत्मविश्वास और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती है। पिछले कुछ वर्षों में, शिक्षा प्रणाली में कई बदलाव किए गए हैं, जिनका उद्देश्य छात्रों को बेहतर अवसर और संसाधन प्रदान करना है। NEP 2020 की सिफारिशों के अनुसार, शिक्षा में सुधार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

इसके अलावा, यह भी महत्वपूर्ण है कि छात्र और अभिभावक इस नई प्रणाली का सही तरीके से लाभ उठाएं। छात्रों को चाहिए कि वे अपनी कमजोरियों पर ध्यान दें और उन विषयों में सुधार करने का प्रयास करें, जहां उन्हें कठिनाई होती है। इस प्रकार, सीबीएसई की सेकंड बोर्ड परीक्षा न केवल छात्रों के लिए एक अवसर है, बल्कि यह उन्हें अपने भविष्य के लिए बेहतर तैयार करने का भी एक माध्यम है।

अंत में, यह कहना उचित होगा कि सीबीएसई ने इस नई परीक्षा प्रणाली के माध्यम से छात्रों के लिए एक सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया है। इससे न केवल छात्रों के अंकों में सुधार हुआ है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस प्रकार, शिक्षा प्रणाली में इस तरह के सुधारों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है ताकि छात्रों को बेहतर अवसर और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकें।

सीबीएसई की परीक्षा प्रणाली में यह बदलाव केवल छात्रों के लिए नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण है। अभिभावक अपने बच्चों के प्रदर्शन में सुधार को देखकर संतुष्ट हैं और उन्हें विश्वास है कि यह प्रणाली उनके बच्चों के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकती है। शिक्षकों के लिए भी यह एक अवसर है कि वे छात्रों की कमजोरियों को पहचानकर उन्हें सही मार्गदर्शन प्रदान कर सकें।

इसके अलावा, यह भी ध्यान देने योग्य है कि NEP 2020 के तहत शिक्षा में तकनीकी सुधारों की दिशा में कई कदम उठाए जा रहे हैं। इनमें डिजिटल शिक्षा, ऑनलाइन शिक्षण सामग्री, और तकनीकी उपकरणों का उपयोग शामिल हैं, जो छात्रों को एक समकालीन और प्रभावी तरीके से सीखने में मदद कर रहे हैं।

सीबीएसई की परीक्षा प्रणाली के इस नए स्वरूप ने छात्रों को आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा की भावना को बढ़ावा दिया है। अब छात्रों को यह महसूस होता है कि उन्हें केवल एक बार परीक्षा में उत्तीर्ण होने का दबाव नहीं है, बल्कि वे अपनी मेहनत और प्रयासों के अनुसार अपने अंकों को सुधार सकते हैं। यह पहल छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है, क्योंकि वे अब तनावमुक्त होकर परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं।

अंततः, सीबीएसई की सेकंड बोर्ड परीक्षा एक महत्वपूर्ण कदम है जो छात्रों को उनके शैक्षणिक जीवन में नई संभावनाएं और अवसर प्रदान करती है। यह न केवल उनके अंकों में सुधार लाने की दिशा में एक प्रयास है, बल्कि यह उन्हें आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने का भी एक माध्यम है। इस प्रकार, शिक्षा प्रणाली में इस तरह के सुधारों को आगे बढ़ाना आवश्यक है ताकि सभी छात्रों को समान अवसर और संसाधन मिल सकें।

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