जबलपुर के आर्यमन सोलंकी ने नीट-यूजी में मध्य प्रदेश में प्रथम रैंक और देश में 46वीं रैंक प्राप्त की। उन्होंने 12 से 14 घंटे पढ़ाई की।
भोपाल, भारत 17 जुल॰ 2026 ALN: नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने गुरुवार देर रात मेडिकल के स्नातक कोर्सों में दाखिले से जुड़ी परीक्षा नीट-यूजी का परिणाम घोषित कर दिया। जबलपुर के छात्र आर्यमन सोलंकी ने मध्य प्रदेश में प्रथम रैंक और देश में 46वीं रैंक प्राप्त की है। वे यूरोलाजिस्ट फणींद्र सोलंकी और गायनाक्लाजिस्ट अनुपमा सोलंकी के पुत्र हैं। इनकी बड़ी बहन तनिया ने भी इसी वर्ष मेडिकल यूजी की पढ़ाई जबलपुर से पूरी की है।
नीट-यूजी (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट - अंडर ग्रेजुएट) भारत में मेडिकल कॉलेजों में स्नातक चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश परीक्षा है। यह परीक्षा हर वर्ष लाखों छात्रों द्वारा दी जाती है, और इसे पास करने वाले छात्रों को विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में दाखिले का अवसर मिलता है। आर्यमन की इस सफलता ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे जबलपुर शहर को गर्वित किया है।
आर्यमन ने कहा कि गुरुवार रात करीब नौ बजे एनटीए ने फाइनल आंसरशीट जारी की थी। तब लग गया था कि रिजल्ट आने वाला है। साढ़े दस बजे करीब रिजल्ट देखा तो पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। स्टेट टॉपर रहूंगा यह नहीं सोचा था पर अच्छे नंबर आने की उम्मीद जरूर थी।
आर्यमन ने कहा कि वे दिन में 12 से 14 घंटे पढ़ाई करते थे। यह एक सामान्य दिन की उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। जब मेहनत का परिणाम मिलता है तो खुशी को शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि कक्षा नवमीं से ही नीट की तैयारी पूरी मेहनत के साथ शुरू कर दी थी। इस तैयारी के दौरान उन्होंने अपने समय का सही प्रबंधन किया, जिससे वे पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी भाग ले सके।
आर्यमन की योजना एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) में प्रवेश लेने की है, जो भारत के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में से एक है। एम्स में अध्ययन करने का सपना रखने वाले छात्रों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। एम्स में प्रवेश पाने के लिए छात्रों को नीट में उच्च अंक प्राप्त करने की आवश्यकता होती है, और आर्यमन ने यह उपलब्धि प्राप्त की है।
अपनी पढ़ाई को लेकर की गई तैयारी के बारे में आर्यमन ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई को कभी टेंशन के रूप में नहीं लिया। जब पढ़ाई करते थे तो पूरी एकाग्रता के साथ और खेलते थे तो भी मन लगाकर। यह एक महत्वपूर्ण मानसिकता है, क्योंकि तनाव और चिंता छात्रों की प्रदर्शन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं। आर्यमन ने इस बात को समझा और अपने मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखा।
पिता फणींद्र सोलंकी ने कहा कि उन्हें अपने बेटे की सफलता पर गर्व है। कक्षा बारहवीं में नीट के पहले जेईई की परीक्षा देकर भी अच्छे अंक लाए थे। यह दर्शाता है कि आर्यमन में विभिन्न विषयों में उत्कृष्टता प्राप्त करने की क्षमता है। उनकी सफलता ने यह भी साबित किया है कि सही दिशा में मेहनत करने से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
आर्यमन की सफलता की कहानी उन छात्रों के लिए प्रेरणा है जो मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देखते हैं। उनके अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि अगर कोई छात्र समर्पण और मेहनत के साथ अपने लक्ष्यों की ओर बढ़े, तो सफलता अवश्य मिलेगी।
नीट परीक्षा की तैयारी एक चुनौतीपूर्ण कार्य है, जिसमें छात्रों को विभिन्न विषयों जैसे कि भौतिकी, रसायन विज्ञान और जीवविज्ञान में गहन ज्ञान की आवश्यकता होती है। इसके लिए कई छात्र कोचिंग संस्थानों का सहारा लेते हैं, जबकि कुछ छात्र स्व-अध्ययन के माध्यम से तैयारी करते हैं। आर्यमन ने अपनी तैयारी के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाया, जिसमें उन्होंने नियमित रूप से अध्ययन के साथ-साथ खेल और अन्य गतिविधियों में भी भाग लिया।
इस परीक्षा में सफलता के लिए छात्रों को नियमित रूप से मॉक टेस्ट और पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों का अभ्यास करना चाहिए। यह न केवल छात्रों को परीक्षा के प्रारूप से परिचित कराता है, बल्कि उन्हें समय प्रबंधन के कौशल में भी मदद करता है। आर्यमन ने इस प्रक्रिया को अपने अध्ययन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया, जिससे उन्हें आत्मविश्वास मिला।
आर्यमन के परिवार ने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। माता-पिता का समर्थन और प्रोत्साहन छात्रों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है। फणींद्र और अनुपमा सोलंकी ने अपने बच्चों की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित किया और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की। एक सकारात्मक और सहायक पारिवारिक वातावरण ने आर्यमन को अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने में मदद की।
आर्यमन की बड़ी बहन तनिया ने भी इसी वर्ष मेडिकल यूजी की पढ़ाई जबलपुर से पूरी की है, जो परिवार के लिए एक और उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि सोलंकी परिवार ने शिक्षा को उच्च प्राथमिकता दी है और अपने बच्चों को उनके सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया है।
आर्यमन की सफलता न केवल उनके परिवार, बल्कि उनके आसपास के समुदाय के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। जबलपुर जैसे शहरों में, जहां शिक्षा के अवसर सीमित हो सकते हैं, ऐसे उदाहरण छात्रों को अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। आर्यमन की उपलब्धियों से यह संदेश मिलता है कि कड़ी मेहनत और समर्पण से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।
इस तरह की सफलताएं समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद करती हैं। जब युवा छात्र ऐसे उदाहरण देखते हैं, तो वे भी अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रेरित होते हैं। यह सामूहिक रूप से समाज में एक सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देता है।
आर्यमन की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे सही दृष्टिकोण, मेहनत और परिवार का समर्थन किसी भी छात्र को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचा सकता है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया है कि जब हम अपने सपनों के प्रति समर्पित होते हैं, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
नीट परीक्षा का महत्व केवल छात्रों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी है। यह परीक्षा उन छात्रों को एक मंच प्रदान करती है जो चिकित्सा क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। देश में चिकित्सा पेशा एक सम्मानित और आवश्यक पेशा है, और नीट के माध्यम से प्रवेश पाने वाले छात्र भविष्य में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
आर्यमन की सफलता के पीछे उनकी मेहनत, परिवार का समर्थन और सही दिशा में की गई तैयारी का बड़ा हाथ है। इस प्रकार की कहानियाँ हमें यह याद दिलाती हैं कि शिक्षा के क्षेत्र में सफलता केवल बुद्धिमत्ता से नहीं, बल्कि समर्पण, मेहनत और मानसिक स्वास्थ्य के संतुलन से भी प्राप्त की जा सकती है।
अंत में, आर्यमन सोलंकी की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि जब हम अपने लक्ष्यों के प्रति सच्चे होते हैं और मेहनत करते हैं, तो कोई भी सपना हकीकत में बदल सकता है। उनकी सफलता न केवल व्यक्तिगत है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक प्रेरणा है, जो आने वाले छात्रों को उनके करियर के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करेगी।
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