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Himachal: दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए खुला जेबीटी भर्ती का रास्ता, 72 पदों के लिए इस दिन होगी काउंसलिंग

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Jul 12, 2026, 05:35 AM IST
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स्कूल शिक्षा निदेशालय ने विशेष रूप से दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों के लिए जेबीटी के 72 पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की है।

स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए जेबीटी (जूनियर बेसिक टीचर) के 72 पदों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है, जो विशेष रूप से दिव्यांगता श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह कदम सरकार की समावेशी नीतियों का एक हिस्सा है, जिसका उद्देश्य दिव्यांग व्यक्तियों को शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर प्रदान करना है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत काउंसलिंग 15 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएगी, जिससे इस श्रेणी के अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी प्राप्त करने का एक सुनहरा अवसर मिलेगा।

इस भर्ती प्रक्रिया के लिए शिक्षा निदेशालय ने जिला-वार रिक्तियों का रोस्टर और पात्रता संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। रोस्टर के अनुसार, मंडी जिले में 15 पद, कांगड़ा में 10, सिरमौर में 11, बिलासपुर में 9, सोलन में 8, चंबा और शिमला में 5-5, हमीरपुर में 4 और ऊना में 3 पद निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा, किन्नौर और कुल्लू में एक-एक पद उपलब्ध है, जबकि लाहौल-स्पीति में इस श्रेणी का कोई पद नहीं है। यह वितरण विभिन्न जिलों में दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए नौकरी के अवसरों को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।

भर्ती प्रक्रिया में विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांग अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है, जैसे दृष्टिबाधित, कम दृष्टि, श्रवण बाधित, ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर, बौद्धिक दिव्यांगता, मानसिक बीमारी तथा बहु-दिव्यांगता। प्रत्येक श्रेणी के लिए निर्धारित पदों का अलग-अलग रोस्टर जारी करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी प्रकार की दिव्यांगता वाले अभ्यर्थियों को समान अवसर मिले। इस भर्ती के लिए अभ्यर्थियों को जेबीटी/डीएलएड योग्यता के साथ टेट (टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट) उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।

काउंसलिंग में भाग लेने के लिए अभ्यर्थियों को कुछ शैक्षणिक प्रमाण पत्र, जैसे टेट प्रमाण पत्र, बोनाफाइड हिमाचली प्रमाण पत्र, दिव्यांगता प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की मूल प्रतियां लानी होंगी। यह सुनिश्चित किया गया है कि काउंसलिंग के बाद किसी अतिरिक्त दस्तावेज पर विचार नहीं किया जाएगा, जिससे प्रक्रिया को पारदर्शी और सुव्यवस्थित बनाया जा सके।

मेरिट में मिलेंगे अतिरिक्त अंक, प्रशिक्षु आधार पर होगी नियुक्ति
भर्ती प्रक्रिया में केवल शैक्षणिक योग्यता को ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को भी महत्व दिया जाएगा। दिव्यांगता प्रतिशत, अतिरिक्त योग्यता, बीपीएल (बॉटम ऑफ पिरामिड) परिवार, पिछड़ा क्षेत्र, भूमिहीन परिवार, एकल महिला, अनाथ या एकल पुत्री जैसी श्रेणियों के लिए अतिरिक्त अंक निर्धारित किए गए हैं। यह पहल उन अभ्यर्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए की गई है जो सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्ग से संबंधित हैं। अधिकतम 30 अंकों के आधार पर अंतिम मेरिट तैयार की जाएगी, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का चयन किया जा सके।

चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रदेश सरकार की नई जॉब ट्रेनी नीति और वर्तमान भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के तहत की जाएगी। यह नीति नए शिक्षकों को प्रशिक्षित करने और उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में आवश्यक कौशल प्रदान करने के लिए बनाई गई है। जिला आवंटन अभ्यर्थियों की मेरिट और उनकी पसंद के आधार पर किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि योग्य अभ्यर्थियों को उनके इच्छित स्थान पर कार्य करने का अवसर मिले।

इस भर्ती प्रक्रिया का उद्देश्य न केवल दिव्यांग व्यक्तियों को रोजगार प्रदान करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि वे समाज के मुख्यधारा में शामिल हों और अपने अधिकारों और अवसरों का पूरा उपयोग कर सकें। शिक्षा के क्षेत्र में दिव्यांग व्यक्तियों की भागीदारी को बढ़ावा देने से न केवल उनके जीवन में सुधार होगा, बल्कि यह समाज में समावेशिता और समानता की भावना को भी मजबूत करेगा।

इसके अलावा, इस प्रक्रिया के माध्यम से दिव्यांग व्यक्तियों की क्षमता को पहचानने और उनके कौशल को निखारने का एक अवसर भी मिलेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि वे न केवल अपने लिए, बल्कि समाज के लिए भी योगदान कर सकें। इस प्रकार की पहलें दीर्घकालिक दृष्टिकोण से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक हो सकती हैं।

अंततः, यह भर्ती प्रक्रिया दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो उन्हें न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करती है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने और अपनी क्षमताओं को साबित करने का भी अवसर देती है। यह सरकार की समावेशी नीतियों का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जो सभी वर्गों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

दिव्यांगता के मुद्दे पर बात करते समय यह महत्वपूर्ण है कि हम समझें कि यह केवल एक चिकित्सा समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और आर्थिक संदर्भ में भी गहराई से जुड़ी हुई है। कई बार, दिव्यांग व्यक्तियों का सामना न केवल शारीरिक बाधाओं से होता है, बल्कि सामाजिक पूर्वाग्रहों और भेदभाव का भी सामना करना पड़ता है। ऐसे में, इस प्रकार की भर्ती प्रक्रिया न केवल उनके लिए रोजगार के अवसर पैदा करती है, बल्कि यह समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी एक साधन बनती है।

दिव्यांग व्यक्तियों की शिक्षा और रोजगार के लिए इस तरह के अवसर उनके आत्म-सम्मान और आत्म-विश्वास को बढ़ाते हैं। जब वे शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हैं, तो यह न केवल उनके लिए एक रोजगार का साधन होता है, बल्कि यह उन्हें समाज में अपनी पहचान बनाने का भी अवसर देता है। इससे न केवल उनके जीवन में सुधार होता है, बल्कि वे समाज के विकास में भी योगदान देते हैं।

समाज में समावेशिता का महत्व इस बात में है कि जब हम सभी वर्गों के व्यक्तियों को समान अवसर प्रदान करते हैं, तो यह न केवल उनके लिए बल्कि पूरे समाज के लिए लाभदायक होता है। यह एक ऐसा समाज बनाने में मदद करता है जहां सभी लोग अपनी क्षमताओं के अनुसार योगदान कर सकते हैं और अपने अधिकारों का पूरा उपयोग कर सकते हैं।

इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अवसर प्रदान करना केवल एक जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक नैतिक कर्तव्य भी है। यह सुनिश्चित करना कि सभी को शिक्षा और रोजगार के समान अवसर मिलें, एक समावेशी समाज की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस प्रकार, जेबीटी भर्ती प्रक्रिया दिव्यांग व्यक्तियों के लिए न केवल एक अवसर है, बल्कि यह एक सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी है। यह दर्शाता है कि सरकार और समाज दोनों ही दिव्यांगता के मुद्दे को गंभीरता से ले रहे हैं और इसे सुलझाने के लिए सक्रिय कदम उठा रहे हैं।

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