रतनपुर में आयोजित सम्मान समारोह में गम्मत कलाकार शिवकुमार धीवर को सम्मानित किया गया। कवि गोष्ठी में स्थानीय कवियों ने छत्तीसगढ़ी रचनाओं की प्रस्तुति दी।
नई दिल्ली, भारत 12 जुल॰ 2026 ALN: रतनपुर | छत्तीसगढ़ के रतनपुर में हाल ही में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जो बाबू प्यारेलाल गुप्त सृजन पीठ और बाबू रेवाराम साहित्य समिति के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ। इस समारोह में छत्तीसगढ़ी गम्मत के वर्तमान गुटकहार और गम्मत ब्यास, शिवकुमार धीवर को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उन्हें शाल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंटकर उनकी कला और संस्कृति के प्रति समर्पण को मान्यता दी गई। समारोह के दौरान, शिवकुमार धीवर को सम्मानित करने के साथ-साथ आंचलिक कवि गोष्ठी का आयोजन भी किया गया, जिसमें विभिन्न कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति की समृद्धि को उजागर किया।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ कवि काशीराम साहू ने की। काशीराम साहू ने अपने उद्घाटन भाषण में रतनपुरिहा गम्मत की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि पंडित बाबू रेवाराम द्वारा रचित रतनपुरिहा गम्मत क्षेत्र की समृद्ध लोकनाट्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह गम्मत प्रतिवर्ष गणेशोत्सव के दौरान मंचित की जाती है, जो स्थानीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है। साहू ने चिंता व्यक्त की कि वर्तमान समय में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण इस लोकविधा का अस्तित्व संकट में है। उन्होंने कहा कि शिवकुमार धीवर और करैहापारा के अन्य कलाकारों ने इस परंपरा को जीवंत बनाए रखा है, जो कि सराहनीय है।
कार्यक्रम में डॉ. राजेन्द्र कुमार वर्मा, जो सृजन पीठ के अध्यक्ष हैं, ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि गम्मत केवल एक नाट्य कला नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की संस्कृति, भाषा और समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सम्मान केवल शिवकुमार धीवर का नहीं, बल्कि पूरी गम्मत परंपरा और उससे जुड़े सभी कलाकारों का सम्मान है। इस प्रकार, यह समारोह न केवल एक व्यक्ति के योगदान को मान्यता देता है, बल्कि एक पूरी सांस्कृतिक धारा को भी उजागर करता है।
सम्मान समारोह के बाद आयोजित कवि गोष्ठी में कई प्रसिद्ध कवियों ने भाग लिया। इस गोष्ठी में काशीराम साहू, जनक राम साहू, रामानंद यादव, पुष्पा तिवारी, शिवकुमार धीवर, रामकिशोर तिवारी, उमेश तिवारी, प्रमोद कश्यप और भानुप्रताप कश्यप जैसे कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। इन कवियों ने गीत, ग़ज़ल और छत्तीसगढ़ी रचनाओं की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह गोष्ठी छत्तीसगढ़ी साहित्य और संस्कृति के प्रति प्रेम और समर्पण को दर्शाती है।
इस प्रकार का आयोजन न केवल स्थानीय कलाकारों के लिए एक प्रोत्साहन का कार्य करता है, बल्कि यह युवा पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का एक माध्यम है। छत्तीसगढ़ी गम्मत और अन्य लोकनाट्य परंपाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे समाज की समस्याओं, मान्यताओं और संस्कृति का एक दर्पण भी हैं। इस प्रकार के समारोहों के माध्यम से, समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाने का एक प्रयास किया जाता है।
गम्मत की परंपरा छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों में गहराई से जड़ित है। यह न केवल मनोरंजन का एक साधन है, बल्कि यह सामाजिक मुद्दों को उठाने और सामूहिकता को बढ़ावा देने का भी एक तरीका है। गम्मत में विभिन्न पात्रों के माध्यम से समाज की सच्चाइयों को उजागर किया जाता है, जिससे दर्शकों में जागरूकता और संवेदनशीलता बढ़ती है। ऐसे समारोहों के आयोजन से यह सुनिश्चित होता है कि नई पीढ़ी भी इस समृद्ध परंपरा से अवगत हो और इसे आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाए।
इस सम्मान समारोह का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ी संस्कृति और कला को जीवित रखने के लिए समाज के विभिन्न वर्गों का सहयोग आवश्यक है। स्थानीय प्रशासन, साहित्यिक संस्थाएं और कलाकार मिलकर इस दिशा में कार्य कर रहे हैं, ताकि छत्तीसगढ़ी गम्मत और अन्य लोककला का संरक्षण और संवर्धन किया जा सके। यह न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी छत्तीसगढ़ की पहचान को मजबूत करता है।
इसके अलावा, इस तरह के आयोजनों में भाग लेने वाले युवा कवियों और कलाकारों को भी मंच मिलता है, जिससे वे अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित कर सकते हैं और अपने विचारों को साझा कर सकते हैं। यह उन्हें प्रेरित करता है कि वे अपनी कला को और अधिक विकसित करें और अपनी सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने में योगदान दें। इस प्रकार, रतनपुर में आयोजित यह सम्मान समारोह न केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम था, बल्कि यह छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का एक महत्वपूर्ण कदम भी था।
छत्तीसगढ़ी गम्मत की परंपरा की गहराई को समझने के लिए हमें इसके ऐतिहासिक संदर्भ में जाना होगा। गम्मत एक प्रकार का लोक नाटक है, जो विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर आधारित होता है। यह न केवल मनोरंजन का साधन है, बल्कि यह एक माध्यम है जिसके जरिए कलाकार समाज के मुद्दों को उजागर करते हैं। गम्मत में हास्य, व्यंग्य और सामाजिक संदेशों का समावेश होता है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करता है।
समारोह के दौरान, काशीराम साहू ने यह भी बताया कि गम्मत का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है और यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने कहा कि गम्मत के माध्यम से न केवल मनोरंजन किया जाता है, बल्कि यह एक सामाजिक संवाद का भी साधन है। गम्मत के पात्र विभिन्न सामाजिक वर्गों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके माध्यम से समाज की समस्याओं को उठाया जाता है।
इस आयोजन में शामिल होने वाले कवियों ने भी अपनी रचनाओं में छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपराओं को उजागर किया। कवि जनक राम साहू ने अपनी कविता में छत्तीसगढ़ की लोककला और संस्कृति की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति में विविधता है, जो इसे अद्वितीय बनाती है।
रतनपुर में आयोजित इस सम्मान समारोह का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि यह स्थानीय समुदाय को एकजुट करने का कार्य करता है। ऐसे समारोहों के माध्यम से स्थानीय लोग एकत्र होते हैं और अपनी सांस्कृतिक धरोहर का जश्न मनाते हैं। यह न केवल सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ाता है, बल्कि समुदाय के सदस्यों के बीच एकता और सहयोग को भी बढ़ावा देता है।
अंत में, यह कहना उचित होगा कि रतनपुर में आयोजित यह सम्मान समारोह छत्तीसगढ़ी गम्मत और साहित्य के प्रति समाज की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह आयोजन न केवल कलाकारों और कवियों के लिए एक मंच प्रदान करता है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम भी है। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा मिलता है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत भी बनता है।
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