जापान से बढ़ता व्यापार घाटा चिंताजनक, FICCI अध्यक्ष ने की बाजार में पहुंच बढ़ाने की मांग

ALN NEWS DESK
एएलएन न्यूज डेस्क
अपडेटेड : Aug 25, 2026, 11:37 AM IST
4 min read
  • linkedin
  • twitter
  • facebook
  • instagram
  • whatsapp

FICCI अध्यक्ष अनंत गोयनका ने जापान के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता जताई। उन्होंने भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच और प्रमाणन की मान्यता की मांग की।

फिक्की के अध्यक्ष अनंत गोयनका ने मंगलवार को जापान के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने भारतीय निर्यातकों के लिए बेहतर बाजार पहुंच की मांग की। गोयनका ने टोक्यो में भारतीय प्रमाणन को अधिक मान्यता देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों को जापानी बाजार में प्रवेश में कठिनाई हो रही है। फिक्की भारत का सबसे पुराना और सबसे बड़ा शीर्ष व्यापारिक संगठन है, इसका पूरा नाम 'फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री' है।

व्यापार घाटा क्यों बढ़ रहा है?

दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में 15.4 अरब रुपये तक पहुंच गया। यह 2024-25 में 12.66 अरब रुपये था। 2023-24 में यह 12.53 अरब रुपये और 2022-23 में 11 अरब रुपये था। गोयनका ने कहा कि जापानी बाजार में प्रवेश के लिए गुणवत्ता मानकों को पूरा करना कठिन है। उन्होंने जापानी कंपनियों के उत्पादों को खरीदने के सांस्कृतिक पक्षपात का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन बाधाओं को दूर करना द्विपक्षीय व्यापार को संतुलित करने के लिए महत्वपूर्ण है।

गोयनका ने बताया कि भारत का जापान के साथ व्यापार मुख्य रूप से एकतरफा बढ़ा है। भारतीय फार्मा कंपनियों को जापान में अपने उत्पादों को पंजीकृत करने में विशेष दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने इसे एक बड़ी चुनौती बताया, जिसे हल करना आवश्यक है। फिक्की अध्यक्ष ने कहा कि भारतीय उद्योग जापान में भारतीय प्रमाणन की मान्यता चाहता है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन मुद्दों को भारत-जापान मुक्त व्यापार समझौते की व्यापक समीक्षा के बाहर भी सुलझाया जा सकता है। दोनों देशों के बीच दोतरफा वाणिज्य 2025-26 में 9.18 फीसदी बढ़कर 27.47 अरब रुपये हो गया। यह 2024-25 में 25.16 अरब रुपये था। 2025-26 में निर्यात 6.03 अरब रुपये और आयात 21.43 अरब रुपये रहा। गोयनका RPG ग्रुप के उपाध्यक्ष भी हैं, जो 5.2 अरब रुपये का एक समूह है।

भारत-जापान व्यापार संबंधों का इतिहास

भारत और जापान के बीच व्यापारिक संबंधों का इतिहास कई दशकों पुराना है। दोनों देशों ने 1952 में एक व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिसने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा दिया। जापान ने भारत को औद्योगिक विकास में मदद करने के लिए कई सहायता कार्यक्रमों की शुरुआत की और इसके परिणामस्वरूप भारतीय उद्योगों ने जापानी तकनीक और निवेश का लाभ उठाया। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में, व्यापार घाटा बढ़ता जा रहा है, जो कि भारत के लिए चिंता का विषय है।

जापान, भारतीय बाजार में एक महत्वपूर्ण निवेशक रहा है, विशेषकर इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्रों में। इसके अलावा, जापान ने भारत को कई आर्थिक सहायता योजनाओं के तहत वित्तीय मदद प्रदान की है। लेकिन, इसके बावजूद, भारत का निर्यात जापान के लिए अपेक्षाकृत कम बना हुआ है।

भारतीय उद्योग की चुनौतियाँ

गोयनका ने जापानी बाजार में भारतीय उत्पादों के प्रवेश में आने वाली बाधाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कंपनियों को जापानी गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में कठिनाई हो रही है। इसके अलावा, भारतीय फार्मा कंपनियों को अपने उत्पादों को जापान में पंजीकृत करने में विशेष दिक्कतें आ रही हैं। यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि जापान के स्वास्थ्य और सुरक्षा मानक बहुत उच्च हैं, जिससे भारतीय कंपनियों को अपने उत्पादों की गुणवत्ता और सुरक्षा को प्रमाणित करने में कठिनाई होती है।

गोयनका ने यह भी बताया कि भारतीय उत्पादों की खरीद में जापानी कंपनियों की सांस्कृतिक प्राथमिकताओं की भूमिका है। जापान में, स्थानीय उत्पादों की प्राथमिकता होती है और विदेशी उत्पादों को स्वीकार करने में समय लगता है। इसके अलावा, जापानी उपभोक्ता गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर बहुत ध्यान देते हैं, जो भारतीय उत्पादों के लिए एक चुनौती बनता है।

भविष्य की संभावनाएँ

भारत और जापान के बीच व्यापार संबंधों को मजबूत करने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं। गोयनका ने सुझाव दिया कि भारत-जापान मुक्त व्यापार समझौते की व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि भारतीय उत्पादों के लिए जापानी बाजार में पहुंच को आसान बनाया जा सके। इसके अलावा, जापान में भारतीय प्रमाणन की मान्यता बढ़ाने की आवश्यकता है, ताकि भारतीय कंपनियों को बाजार में प्रवेश में आसानी हो।

यदि इन चुनौतियों को हल किया जाता है, तो यह न केवल भारत के लिए लाभकारी होगा, बल्कि जापान के लिए भी एक अवसर प्रदान करेगा। भारतीय बाजार तेजी से विकसित हो रहा है और जापान के लिए यह एक महत्वपूर्ण व्यापारिक अवसर हो सकता है। दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के लिए, व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल, व्यापार मेलों और अन्य कार्यक्रमों का आयोजन किया जा सकता है।

इस प्रकार, भारत और जापान के बीच व्यापार घाटे को कम करने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। यदि यह संभव होता है, तो दोनों देशों के लिए यह एक लाभकारी स्थिति हो सकती है, जो द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाएगी।

Get More Updates

To learn more about the latest developments in Trade & Commerce, stay updated with our exclusive reports and analyses on AILensNews.

Related News